रायपुर 7 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ को इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के क्षेत्र में बड़ी सफलता मिली है। केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने राजनांदगांव जिले के ग्राम पटेवा में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (EMC 2.0) की स्थापना को मंजूरी दे दी है। राज्य सरकार का दावा है कि इस परियोजना से करीब 9 हजार युवाओं को रोजगार मिलेगा, जबकि 3 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का रास्ता खुलेगा। केंद्र सरकार ने EMC 2.0 योजना के तहत 432.08 करोड़ रुपये की परियोजना के लिए 210.56 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता मंजूर की है।
इस परियोजना का क्रियान्वयन छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम (CSIDC) करेगा। राज्य सरकार इसे औद्योगिक निवेश और रोजगार सृजन की दिशा में अहम उपलब्धि मान रही है।यह राज्य का दूसरा इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर होगा। इससे पहले नवा रायपुर में इस तरह का क्लस्टर विकसित किया जा चुका है। नए क्लस्टर के जरिए आधुनिक औद्योगिक आधारभूत संरचना, रेडी-बिल्ट फैक्ट्रियां, वेयरहाउस, बिजली और जलापूर्ति जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों के लिए निवेश का अनुकूल वातावरण तैयार होगा। सरकार के मुताबिक, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की चार एंकर कंपनियां पहले ही इस परियोजना में रुचि जता चुकी हैं।
इन कंपनियों की ओर से करीब 365 करोड़ रुपये के शुरुआती निवेश का प्रस्ताव भी दिया गया है। करीब 306.56 एकड़ भूमि पर विकसित होने वाले इस क्लस्टर में 150.56 एकड़ क्षेत्र औद्योगिक इकाइयों के लिए आरक्षित रहेगा। परियोजना के लिए आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियां पूरी हो चुकी हैं और निर्माण कार्य शुरू करने की तैयारी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस स्वीकृति के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार जताते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ अब देश के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र में तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना प्रदेश के युवाओं के लिए दीर्घकालिक और गुणवत्तापूर्ण रोजगार के अवसर लेकर आएगी।
इसके लिए तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों को भी उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जाएगा। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि राज्य सरकार ने निवेशकों के लिए पारदर्शी और त्वरित व्यवस्था विकसित की है। ‘वनक्लिक’ सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए भूमि आवंटन और अन्य आवश्यक स्वीकृतियां समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे उद्योगों को परियोजनाएं शुरू करने में आसानी होगी।यह परियोजना ‘मेक इन इंडिया’, ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे राष्ट्रीय अभियानों को गति देने के साथ-साथ छत्तीसगढ़ को देश के उभरते इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी अहम कदम मानी जा रही है। आने वाले समय में इस क्लस्टर की प्रगति और प्रस्तावित निवेश के धरातल पर उतरने पर सभी की नजर रहेगी।


