कोरबा, 2 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ में शराब नीति को लेकर सियासत एक बार फिर गर्म हो गई है। आबकारी मंत्री लखनलाल देवांगन के गृह जिले कोरबा में प्रस्तावित शराब दुकान को लेकर राजनीतिक टकराव खुलकर सामने आ गया। उरगा थाना क्षेत्र के बरबसपुर गांव में शराब दुकान खोले जाने की आशंका के बीच स्थानीय ग्रामीण विरोध पर उतर आए, जबकि इस मुद्दे पर पूर्व राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल और आबकारी मंत्री लखनलाल देवांगन एक बार फिर आमने-सामने आ गए हैं। पूर्व मंत्री ने जहां ग्रामीणों के समर्थन में शराब दुकान नहीं खुलने दिये जाने का दावा किया है। वहीं दूसरी तरफ आबाकारी मंत्री ने ऐलान कर दिया कि…..यदि बहनें नहीं चाहेंगी तो शराब दुकान नहीं खुलेगी ।
गौरतलब है कि बरबसपुर में शराब दुकान खोले जाने की चर्चा के बाद ग्रामीणों, खासकर महिलाओं ने विरोध शुरू कर दिया। इस विरोध का पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने भी महिलाओं को अपना समर्थन देते हुए पहले ही शराब दुकान का विरोध किया है। इसी बीच शनिवार को पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल धरना स्थल पहुंचे और ग्रामीणों के आंदोलन को अपना समर्थन दिया। ग्रामीणों ने गांव के पास शराब दुकान खोलने का विरोध करते हुए प्रस्ताव वापस लेने की मांग की। धरना स्थल पर मीडिया से बातचीत में पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने आबकारी मंत्री लखनलाल देवांगन पर महिलाओं की भावनाओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण किसी भी कीमत पर गांव में शराब दुकान नहीं खुलने देंगे और सरकार को इस प्रस्ताव को तत्काल वापस लेना चाहिए।
उधर, आबकारी मंत्री लखनलाल देवांगन ने पूरे विवाद पर सफाई देते हुए कहा कि बरबसपुर में फिलहाल कोई शराब दुकान खोली नहीं जा रही है। उन्होंने बताया कि आबकारी विभाग की टीम ने केवल संभावित स्थल का निरीक्षण किया था, जिसके बाद जानकारी के अभाव में ग्रामीणों के बीच भ्रम की स्थिति बन गई। मंत्री देवांगन ने कहा कि यदि क्षेत्र की महिलाएं शराब दुकान का विरोध कर रही हैं, तो सरकार उनकी भावना का सम्मान करेगी और वहां दुकान नहीं खोली जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि ग्रामीण सीधे उनसे संपर्क कर जानकारी लेते, तो आंदोलन की नौबत नहीं आती। बरबसपुर में शराब दुकान को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक रंग ले चुका है। एक ओर विपक्ष के नेता सरकार और आबकारी मंत्री पर ग्रामीणों की भावनाओं की अनदेखी का आरोप लगा रहे है, तो दूसरी ओर मंत्री का कहना है कि अभी दुकान खोलने का कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। ऐसे में यह मुद्दा आने वाले दिनों में कोरबा की राजनीति का अहम विषय बन सकता है।

