रायपुर 28 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर को लेकर राजनीतिक घमासान लगातार तेज होता जा रहा है। एक तरफ राज्य सरकार स्मार्ट मीटर को बिजली व्यवस्था को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की पहल बता रही है, तो दूसरी ओर कांग्रेस इसे आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ करार देकर लगातार विरोध कर रही है। इसी कड़ी में कांग्रेस ने प्रदेशभर में स्मार्ट मीटर और बढ़े हुए बिजली बिलों के खिलाफ प्रदर्शन किया। पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए स्मार्ट मीटर को “महतारी वंदन वसूली मीटर” बताया।
विकास उपाध्याय ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि…सरकार महिलाओं को महतारी वंदन योजना के तहत हर महीने 1000 रुपये दे रही है, लेकिन दूसरी ओर बढ़े हुए बिजली बिलों के जरिए उससे कई गुना ज्यादा राशि वसूल रही है। विकास उपाध्याय ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के नेतृत्व में पूरे प्रदेश में स्मार्ट मीटर के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। कांग्रेस कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों की सहमति से स्मार्ट मीटर हटाने के लिए आवेदन भी भरवा रहे हैं। कांग्रेस का दावा है कि जिन उपभोक्ताओं का पहले बिजली बिल 1000 से 1500 रुपये के बीच आता था, स्मार्ट मीटर लगने के बाद कई मामलों में बिल पांच से सात गुना तक बढ़ गया है।
कांग्रेस पार्टी का कहना है कि इसका सबसे ज्यादा असर मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर पड़ा है, जिससे घरेलू बजट बिगड़ रहा है और कई परिवारों को बिजली बिल चुकाने के लिए कर्ज तक लेना पड़ रहा है।कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि बिजली उत्पादन के मामले में सरप्लस राज्य होने के बावजूद छत्तीसगढ़ के लोगों को महंगी बिजली मिल रही है। पार्टी ने कहा कि पहले बिजली बिल हाफ योजना से लोगों को राहत मिलती थी, लेकिन अब स्मार्ट मीटर और बढ़ी हुई बिजली दरों ने उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस ने सरकार से स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया तत्काल रोकने, पहले से लगाए गए स्मार्ट मीटर हटाने और बढ़े हुए बिजली बिलों की समीक्षा कराने की मांग की। पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशभर में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। फिलहाल, स्मार्ट मीटर को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। कांग्रेस जहां इसे जनता पर आर्थिक बोझ बता रही है, वहीं सरकार का पक्ष इस मुद्दे पर सामने आना अभी बाकी है। आने वाले दिनों में यह विवाद प्रदेश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बना रह सकता है।

