रायपुर 28 जुलाई 2026।छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्मार्ट मीटर योजना को लेकर राज्य सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया के कारण हजारों बिजली मीटर रीडिंग कर्मचारियों की आजीविका खतरे में पड़ गई है। बघेल ने कहा कि सरकार तकनीक के नाम पर रोजगार खत्म कर रही है, जबकि इसका खामियाजा फील्ड में काम करने वाले कर्मचारी भुगत रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक विद्युत मीटर रीडिंग कर्मचारी संघ के बैनर तले आयोजित आंदोलन स्थल में आज पूर्व सीएम भूपेश बघेल पहुंचे। जहां उन्होने मीडिर रीडरों को काम से निकाले जाने पर चिंता जताते हुए राज्य सरकार पर हमला बोला। उन्होने एक्स पर लिखा….”छत्तीसगढ़ में विद्युत मीटर रीडिंग कर्मचारियों को निकालने की तैयारी हो रही है। उनकी रोजी-रोटी मीटर रीडिंग से ही चलता है। अब स्मार्ट मीटर जैसे-जैसे लग रहा है, इन लोगों को पैसा मिलना बंद हो जाएगा। एक तरफ बिजली बिल अधिक होने से मीटर रीडर गाली खाता है जबकि बिजली बिल बढ़ाने वाली और स्मार्ट मीटर लगाने वाली राज्य सरकार है।”
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि….प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे मीटर रीडर हैं, जिनके परिवार की आजीविका इसी काम पर निर्भर है। लेकिन स्मार्ट मीटर लगने के साथ ही उनकी आय के स्रोत बंद होने लगे हैं। भूपेश बघेल ने यह भी कहा कि बिजली उपभोक्ताओं के बढ़े हुए बिल का गुस्सा सबसे पहले मीटर रीडरों को झेलना पड़ता है। और आज उसी के रोजगार पर संकट गहरा गया है। बघेल ने एक बार फिर आम लोगों से स्मार्ट मीटर से आने वाले अधिक बिल का विरोध कर तत्काल बिजली आफिस में पुराने मीटर लगाने के लिए आवेदन देने की बात कही।
गौरतलब है कि स्मार्ट मीटर को लेकर प्रदेश में पहले से ही बहस जारी है। विपक्ष इसे आम उपभोक्ताओं और कर्मचारियों से जुड़ा मुद्दा बताते हुए सरकार पर सवाल उठा रहा है, जबकि सरकार का दावा है कि स्मार्ट मीटर से बिजली व्यवस्था अधिक पारदर्शी होगी, बिलिंग में सुधार आएगा और बिजली चोरी पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।अब भूपेश बघेल के इस बयान के बाद स्मार्ट मीटर का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। आने वाले दिनों में इस पर सरकार की प्रतिक्रिया और विपक्ष की रणनीति पर नजर रहेगी।

