रायपुर 25 जुलाई 2026। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद छत्तीसगढ़ भाजपा के भीतर अलग-अलग स्वर सुनाई देने लगे हैं। विधानसभा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसले को उचित बताते हुए उसका समर्थन किया है। वहीं, राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा नहीं देना चाहिए था। उन्होंने उनसे देशहित में इस्तीफा वापस लेने की अपील भी की। एक ही मुद्दे पर पार्टी के दो वरिष्ठ नेताओं के अलग-अलग बयानों ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। विपक्ष ने इसे भाजपा के भीतर मतभेद का संकेत बताते हुए केंद्र और राज्य नेतृत्व के बीच समन्वय पर सवाल उठाए हैं।
रमन सिंह ने कहा- सरकार ने युवाओं की भावनाओं का सम्मान किया
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. रमन सिंह ने कहा कि NEET विवाद को लेकर देशभर में छात्रों और युवाओं में आक्रोश था। ऐसे में केंद्र सरकार ने बड़ा और संवेदनशील फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए और कड़े कानून बनाए जाएंगे। रमन सिंह के मुताबिक, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा युवाओं के गुस्से को शांत करने और शिक्षा व्यवस्था में भरोसा कायम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
गजेंद्र यादव बोले- जांच पूरी होने से पहले इस्तीफा जरूरी नहीं था
रमन सिंह के बयान के कुछ देर बाद स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने अलग राय रखी। उन्होंने कहा कि जब मामले की जांच के लिए समिति गठित हो चुकी है और फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए कार्रवाई शुरू हो गई है, तब इस्तीफा देने की आवश्यकता नहीं थी। गजेंद्र यादव ने कहा कि किसी भी मंत्रालय में हजारों अधिकारी और कर्मचारी काम करते हैं। यदि कहीं कोई अनियमितता होती है, तो उसके लिए सीधे मंत्री को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि कोई भी मंत्री अपने विभाग में गड़बड़ी नहीं चाहता और जांच पूरी होने से पहले इस्तीफा देना सही नहीं माना जा सकता। उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान से अपना इस्तीफा वापस लेने की अपील भी की।
विपक्ष ने साधा निशाना
दोनों नेताओं के अलग-अलग बयानों को लेकर कांग्रेस ने भाजपा पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। विपक्ष का कहना है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर भाजपा के भीतर ही एकराय नहीं है। कांग्रेस का आरोप है कि सार्वजनिक मंच पर आए इन विरोधाभासी बयानों से पार्टी के अंदर मतभेद उजागर हो रहे हैं। हालांकि, भाजपा की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है।राजनीतिक दृष्टि से देखें तो धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर छत्तीसगढ़ भाजपा के दो वरिष्ठ नेताओं के विपरीत बयान महज व्यक्तिगत राय से आगे का संदेश भी दे सकते हैं।
एक तरफ डॉ. रमन सिंह ने केंद्रीय नेतृत्व के फैसले के साथ मजबूती से खड़े होने का संकेत दिया, वहीं दूसरी ओर गजेंद्र यादव ने मंत्री के पक्ष में खुलकर बयान देकर अलग राजनीतिक संदेश दिया। अब नजर इस बात पर रहेगी कि भाजपा केंद्रीय नेतृत्व इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक रुख स्पष्ट करता है या नहीं। वहीं विपक्ष इस मुद्दे को आगामी राजनीतिक बहस में कितना बड़ा बनाता है, यह भी आने वाले दिनों में साफ होगा।

