रायपुर, 25 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में गिरफ्तार कांग्रेस नेता और प्रदेश कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को शनिवार को अदालत ने 5 अगस्त तक न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया। उन्हें आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने अदालत में पेश किया, जहां से कोर्ट ने उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेजने का आदेश दिया। सुनवाई के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता अदालत पहुंचे और रामगोपाल अग्रवाल से मुलाकात की।
अदालत परिसर में कांग्रेस नेताओं ने जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर सवाल उठाए। मीडिया से बातचीत में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार और केंद्रीय जांच एजेंसियों पर राजनीतिक दुर्भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेताओं को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है और कांग्रेस नेताओं की छवि खराब करने के लिए जांच एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। बघेल ने कहा कि यह कार्रवाई राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है और विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
EOW का दावा- अवैध रकम के लेन-देन में थी भूमिका
आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) के अनुसार, रामगोपाल अग्रवाल पर कथित शराब घोटाले, कोल लेवी और कस्टम मिलिंग से जुड़े अवैध धन के लेन-देन और उसे ठिकाने लगाने में भूमिका निभाने के आरोप हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि मामले में वित्तीय लेन-देन की कई कड़ियों की जांच अभी जारी है और इस संबंध में दस्तावेजों तथा अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) कर रही हैं।
जांच एजेंसियों का दावा है कि यह मामला 3,200 करोड़ रुपये से अधिक के कथित घोटाले से जुड़ा है। एफआईआर में तत्कालीन आबकारी मंत्री, कई वरिष्ठ अधिकारियों, कारोबारियों और अन्य लोगों के नाम शामिल किए गए हैं। मामले में कई आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है, जबकि जांच अभी जारी है।
ED का आरोप- सिंडिकेट बनाकर संचालित किया गया नेटवर्क
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी जांच में दावा किया है कि तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में शराब कारोबार में कमीशन वसूली के लिए एक कथित सिंडिकेट बनाया गया था। एजेंसी के अनुसार, इस नेटवर्क के जरिए अवैध आर्थिक लाभ अर्जित किया गया। ED के मुताबिक, जांच में तत्कालीन आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के तत्कालीन प्रबंध संचालक ए.पी. त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर की कथित भूमिका सामने आई है।
इन आरोपों की जांच विभिन्न एजेंसियों द्वारा की जा रही है और मामले की सुनवाई न्यायालय में लंबित है। रामगोपाल अग्रवाल को 5 अगस्त तक न्यायिक रिमांड पर जेल भेजे जाने के बाद अब जांच एजेंसियां मामले से जुड़े वित्तीय दस्तावेजों, लेन-देन और अन्य आरोपियों के साथ कथित संबंधों की पड़ताल करेंगी। वहीं कांग्रेस ने इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध करार देते हुए जांच एजेंसियों की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।

