Mobile phone addiction: आज के डिजिटल दौर में छोटे बच्चों को खाना खिलाने के लिए मोबाइल या टीवी का सहारा लेना आम बात हो गई है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदत धीरे-धीरे स्क्रीन एडिक्शन का रूप ले सकती है, जिसका असर बच्चे की आंखों, मानसिक विकास, एकाग्रता और व्यवहार पर पड़ता है। अक्सर माता-पिता बच्चे को शांत रखने या आसानी से खाना खिलाने के लिए फोन में कार्टून या वीडियो चला देते हैं।
शुरुआत में यह आसान उपाय लगता है, लेकिन समय के साथ बच्चा बिना स्क्रीन के खाना खाने से इनकार करने लगता है। इससे न सिर्फ उसकी खाने की आदतें बिगड़ती हैं, बल्कि परिवार के साथ संवाद भी कम होने लगता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, बच्चों की मोबाइल की लत छुड़ाने के लिए अचानक फोन छीनने के बजाय धीरे-धीरे स्क्रीन टाइम कम करना चाहिए। शुरुआत में खाने के दौरान कुछ मिनट मोबाइल दें और फिर हर दिन उसका समय कम करते जाएं, ताकि बच्चा बिना तनाव के नई आदत अपना सके।
परिवार के साथ एक ही समय पर बिना मोबाइल के भोजन करना भी इस समस्या का प्रभावी समाधान माना जाता है। बच्चे अपने माता-पिता की आदतों की नकल करते हैं। यदि घर में खाने की मेज पर मोबाइल का इस्तेमाल नहीं होगा, तो बच्चे भी धीरे-धीरे बिना स्क्रीन के खाना खाने की आदत विकसित कर लेंगे। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि खाने के समय बच्चों से बातचीत करें। बच्चे को खाना खिलाते समय बच्चे का मन लगाने के लिए उससे बातें करें या कोई मजेदार कहानी सुनाएं।
बच्चे से उसके दिनभर के बारे में पूछें ताकि उसका ध्यान फोन से हटकर आप से जुड़ने पर लगे। उन्हें भोजन के स्वाद, रंग और आकार के बारे में बताएं या हल्की-फुल्की बातें करें। इससे उनका ध्यान मोबाइल से हटेगा और भोजन का समय परिवार के साथ जुड़ाव का अवसर बन जाएगा। बच्चों की स्क्रीन की लत को समय रहते नियंत्रित करना जरूरी है। छोटी-छोटी सकारात्मक आदतें अपनाकर माता-पिता बच्चों को स्वस्थ जीवनशैली और बेहतर मानसिक विकास की दिशा में आगे बढ़ा सकते हैं।

