रायपुर 19 जुलाई 2026। मध्य प्रदेश के कटनी जिले की विजयराघवगढ़ विधानसभा सीट से भाजपा विधायक संजय पाठक के परिवार की कंपनियों से जुड़े करीब 1000 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में कोलकाता पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रायपुर के कारोबारी महेंद्र गोयनका को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है। अदालत में पेशी के बाद आरोपी को 10 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। अब जांच एजेंसियां फर्जी दस्तावेजों, वित्तीय लेनदेन और कथित साजिश के पूरे नेटवर्क की गहन पड़ताल कर रही हैं।
पुलिस के अनुसार महेंद्र गोयनका पहले संजय पाठक के परिवार की कंपनी यूरो प्रतीक इस्पात इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में प्रमुख प्रबंधकीय पद पर कार्यरत था। आरोप है कि इसी दौरान उसने फर्जी दस्तावेज और कथित जाली हस्ताक्षरों के जरिए परिवार की कई कंपनियों पर अवैध नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश की। इसके अलावा कंपनी के माल की कथित अनियमित बिक्री और वित्तीय गड़बड़ियों के जरिए करोड़ों रुपये के नुकसान का भी आरोप लगाया गया है। इसी मामले में कोलकाता में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 120-बी, 467, 468 और 471 सहित अन्य धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।
जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर कोलकाता पुलिस ने दिल्ली से गोयनका को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उसे पूछताछ के लिए 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। जांच एजेंसियों के मुताबिक महेंद्र गोयनका और उसके सहयोगी निदेशकों के खिलाफ मध्य प्रदेश के कटनी जिले में भी जालसाजी और धोखाधड़ी के दो अलग-अलग मामले दर्ज हैं। कुछ सह-आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट से खारिज हो चुकी हैं, जबकि कई अन्य आरोपी अभी भी फरार बताए जा रहे हैं।
NCLT की टिप्पणियां भी जांच के दायरे में
मामले की जांच के दौरान 9 मई 2025 को राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) की मुंबई पीठ के उस आदेश का भी उल्लेख किया जा रहा है, जिसमें महेंद्र गोयनका और उनकी पत्नी मीनू गोयनका से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं पर टिप्पणियां दर्ज की गई थीं। उनकी एक अन्य कंपनी निसर्ग इस्पात से जुड़े वित्तीय लेनदेन भी पहले जांच एजेंसियों के रडार पर रहे हैं।
कई बड़े खुलासों की अटकलें
महेंद्र गोयनका की गिरफ्तारी के बाद कारोबारी और प्रशासनिक नेटवर्क को लेकर कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। यह भी दावा किया जा रहा है कि पूछताछ के दौरान कई प्रभावशाली लोगों और कथित वित्तीय लेनदेन से जुड़े नए तथ्य सामने आ सकते हैं। हालांकि, कुछ अधिकारियों को संरक्षण देने या अवैध धन के लेनदेन से जुड़े आरोपों की अब तक किसी जांच एजेंसी ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। फिलहाल कोलकाता पुलिस रिमांड के दौरान आरोपी से पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियों का कहना है कि पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और यदि नए तथ्य सामने आते हैं तो मामले में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।

