भिलाई 10 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित भिलाई स्टील प्लांट लोहा चोरी मामले में दुर्ग पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। फ्लू डस्ट की आड़ में लौह स्क्रैप की कथित चोरी के मामले में पहली बार भिलाई स्टील प्लांट के दो वरिष्ठ अधिकारियों की संलिप्तता सामने आई है। पुलिस ने बीएसपी के जनरल मैनेजर हिमांशु भूषण मलिक (54) और असिस्टेंट जनरल मैनेजर मनोज कुमार देवांगन (58) को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, इस मामले में अब तक 15 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। हालांकि पहली बार प्लांट के अंदर कार्यरत वरिष्ठ अधिकारियों की कथित भूमिका सामने आने से मामले ने नया मोड़ ले लिया है।
दुर्ग पुलिस की जांच में सामने आया है कि दोनों अधिकारी कथित तौर पर लोहा चोरी करने वाले गिरोह के संपर्क में थे। पुलिस के अनुसार, फ्लू डस्ट की ढुलाई के दौरान उसमें लौह स्क्रैप मिलाकर प्लांट से बाहर निकाला जाता था। बाद में इस स्क्रैप को ए.के. ट्रेडर्स में जमा किया जाता था। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह पूरा नेटवर्क संगठित तरीके से संचालित किया जा रहा था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि दोनों अधिकारियों की भूमिका कितनी व्यापक थी और इस पूरे नेटवर्क में अन्य किन लोगों की संलिप्तता रही।
26 मई को हुआ था करोड़ों के रैकेट का खुलासा
मामले का खुलासा 26 मई 2026 को हुआ था, जब पुरानी भिलाई थाना पुलिस ने ग्राम अकलोरडीह खदानपारा स्थित ए.के. ट्रेडर्स और हथखोज स्थित एक प्लॉट पर छापेमारी की थी। छापे के दौरान कई हाईवा, ट्रक और अन्य वाहनों में फ्लू डस्ट के साथ लोहे की प्लेट, बीम और कटिंग सामग्री मिली थी। पुलिस ने मौके से करीब 250 टन लौह स्क्रैप जब्त किया था। इसके अलावा स्क्रैप की ढुलाई में इस्तेमाल होने वाले हाईवा, जेसीबी, हाईड्रा समेत कई वाहन और मशीनें भी जब्त की गई थीं। पुलिस के अनुसार, जब्त किए गए सामान और वाहनों की कुल कीमत करीब 3.22 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसमें लगभग 90 लाख रुपये का लौह स्क्रैप शामिल है।
दुर्ग पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है। पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है और फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है। अधिकारियों से पूछताछ के आधार पर मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है। भिलाई स्टील प्लांट से लोहा चोरी का मामला अब राजनीतिक रंग भी ले चुका है। विपक्ष इस मामले में लगातार कार्रवाई की मांग कर रहा है। वहीं, कथित मुख्य सरगना को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। इस बीच पूरे प्रकरण की केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग भी उठने लगी है। बीएसपी जैसे देश के महत्वपूर्ण सार्वजनिक उपक्रम से जुड़े इस मामले में वरिष्ठ अधिकारियों की गिरफ्तारी ने सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी तंत्र और आंतरिक जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

