अंबिकापुर 28 जून 2026। अंबिकापुर नगर निगम की भाजपा महापौर मंजूषा भगत से जुड़े कथित वायरल ऑडियो ने शहर की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। मीना बाजार लगाने के नाम पर कथित तौर पर तीन लाख रुपये लेने के आरोप वाले ऑडियो को लेकर कांग्रेस ने भाजपा पर हमला तेज कर दिया है, जबकि महापौर इसे साजिश बताते हुए ऑडियो को पूरी तरह फर्जी करार दे रही हैं। आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब विपक्ष ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए पुलिस-प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
दरअसल सोशल मीडिया पर वायरल एक कथित ऑडियो में मीना बाजार लगाने की अनुमति दिलाने के एवज में तीन लाख रुपये की मांग किए जाने का दावा किया जा रहा है। यह ऑडियो कथित तौर पर ठेकेदार अनुराग मिश्रा की ओर से जारी किया गया है, जिसमें भाजपा जिलाध्यक्ष भारत सिंह सिसोदिया और महापौर मंजूषा भगत पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि इस ऑडियो की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। विवाद बढ़ने के बाद महापौर मंजूषा भगत खुद अजाक थाना पहुंचीं और ऑडियो तैयार करने तथा उसे सोशल मीडिया पर वायरल करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
मीडिया से बातचीत के दौरान महापौैर भावुक हो गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें एक आदिवासी महिला होने के कारण राजनीतिक षड्यंत्र के तहत बदनाम किया जा रहा है। इधर कांग्रेस का कहना है कि यदि ऑडियो फर्जी है, तो इसकी वैज्ञानिक जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए और यदि आरोप सही हैं तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो। नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद ने कहा कि कांग्रेस किसी व्यक्ति विशेष को निशाना नहीं बना रही, बल्कि शहर के प्रथम नागरिक से जुड़े गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच चाहती है। उनका कहना है कि भाजपा इस पूरे मामले को राजनीतिक रंग देकर असली सवालों से बचने की कोशिश कर रही है।
इस पूरे प्रकरण को लेकर शनिवार को नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद के नेतृत्व में कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल अजाक थाना पहुंचा और थाना प्रभारी से मुलाकात कर वायरल ऑडियो की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मामला उनके क्षेत्राधिकार में नहीं आता। पुलिस ने फिलहाल स्पष्ट किया है कि मामले में अभी एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। आवेदन प्राप्त हुआ है, लेकिन अधिकार क्षेत्र तय होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इसके बाद कांग्रेस ने रविवार को सरगुजा एसपी से मुलाकात कर पूरे मामले की जांच संबंधित थाना क्षेत्र को सौंपने की मांग करने का फैसला लिया है। फिलहाल यह मामला आरोप और प्रत्यारोप के बीच उलझा हुआ है। वायरल ऑडियो की सत्यता की आधिकारिक पुष्टि या फोरेंसिक जांच अभी बाकी है। ऐसे में पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी। लेकिन इतना तय है कि इस विवाद ने अंबिकापुर की स्थानीय राजनीति में हलचल तेज कर दी है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक गरमा सकता है।

