कांकेर 27 जून 2026। छत्तीसगढ़ में वन संरक्षण को लेकर सरकारी दावों के बीच कांकेर से सामने आया एक मामला कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। रावघाट लौह अयस्क परियोजना के लिए बिना वैधानिक अनुमति सड़क निर्माण, सैकड़ों पेड़ों की कटाई और वन भूमि पर निर्माण की पुष्टि होने के बाद वन विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब करीब 540 पेड़ काट दिए गए, पहाड़ काटकर 1.34 किलोमीटर लंबी सड़क बना दी गई, तब तक जिम्मेदार अधिकारी क्या कर रहे थे ? मामले में अब बीएसपी प्रबंधन को नोटिस जारी किया गया है, जबकि विभागीय लापरवाही के आरोप में सात वन अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की गई है।
जानकारी केे मुताबिक ये पूरा मामला उस समय सामने आया जब मीडिया की पड़ताल में बिना वन विभाग की स्वीकृति सड़क निर्माण और बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई का मुद्दा उजागर हुआ। इसके बाद वन विभाग ने पुराने अभिलेखों की जांच कर पांच सदस्यीय जांच दल गठित किया। जांच रिपोर्ट में पाया गया कि लगभग 1340 मीटर लंबी और 9.95 मीटर चौड़ी सड़क का निर्माण बिना किसी वैधानिक अनुमति के किया गया। सड़क निर्माण के लिए पहाड़ी क्षेत्र की खुदाई की गई और प्रथम दृष्टया करीब 540 पेड़ों की कटाई की पुष्टि हुई है। विभाग का कहना है कि विस्तृत जांच के बाद कटे हुए पेड़ों की संख्या और बढ़ सकती है। पूर्व वनमंडलाधिकारी ऋषभ जैन के अनुसार, सड़क निर्माण के लिए वन विभाग से कोई अनुमति नहीं ली गई थी।
प्रारंभिक जांच में भारतीय वन अधिनियम, 1927 और वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के प्रावधानों के उल्लंघन के संकेत मिले हैं। इसी आधार पर बीएसपी रावघाट प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। विभाग का कहना है कि जवाब मिलने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई की गई है। एसडीओ विजय चंद्रवंशी और रेंजर वीरेंद्र यादव को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इसके अलावा पांच वनकर्मियों….वनपाल दीनदयाल नेताम, वनपाल आत्माराम पोटाई, वनरक्षक अश्विनी कुमार नेताम, वनरक्षक सहादुर सिंह ठाकुर और वनरक्षक योगेश कुमार ठाकुर को संबंधित क्षेत्र से तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है और उनसे भी जवाब मांगा गया है।
अब उठ रहे हैं कई बड़े सवाल
यह मामला सिर्फ अवैध सड़क निर्माण या पेड़ों की कटाई तक सीमित नहीं है, बल्कि वन संरक्षण व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। जिस क्षेत्र में बिना अनुमति सड़क बन गई, पहाड़ काटे गए और सैकड़ों पेड़ काट दिए गए, वहां स्थानीय वन अमले को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली ? यदि जानकारी थी तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई ? और यदि जानकारी नहीं थी तो यह विभागीय निगरानी की बड़ी विफलता मानी जाएगी। फिलहाल वन विभाग ने कार्रवाई की शुरुआत कर दी है, लेकिन अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच के बाद जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों के खिलाफ क्या कानूनी कदम उठाए जाते हैं और पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई कैसे सुनिश्चित की जाएगी।

