कबीरधाम 26 जून 2026। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में बच्चों को संस्कार, अनुशासन और नैतिक मूल्यों की शिक्षा देने वाले शिक्षकों के आचरण को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। कबीरधाम और जांजगीर-चांपा जिले से सामने आए दो अलग-अलग मामलों ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को कटघरे में ला खड़ा किया है। एक ओर कबीरधाम में एक शिक्षक पर स्कूल परिसर में शराब पीने का आरोप लगा है, वहीं जांजगीर-चांपा में एक शिक्षक और शिक्षिका से जुड़ा कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग ने जांच शुरू कर दी है। दोनों मामलों ने सरकारी स्कूलों में अनुशासन, जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
कबीरधाम जिले के पंडरिया विकासखंड के सुदूर वनांचल क्षेत्र स्थित ग्राम तेलियापानी लेदरा में पदस्थ शिक्षक सुरेश कुमार नेताम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि शिक्षक स्कूल परिसर में शराब का सेवन कर रहे थे। ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय बच्चों के भविष्य निर्माण का केंद्र होता है और यदि वहीं अनुशासनहीनता के आरोप सामने आएंगे, तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों और अभिभावकों के विश्वास पर पड़ेगा। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि क्षेत्र में स्कूल समय के दौरान शिक्षकों की लापरवाही और अनुशासनहीनता की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं। उनका कहना है कि समय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से ऐसी घटनाएं दोहराई जा रही हैं।
उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। इधर, जांजगीर-चांपा जिले में एक शिक्षक और शिक्षिका से जुड़ा कथित आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है। हालांकि विभाग ने स्पष्ट किया है कि वायरल वीडियो की सत्यता की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और पूरे मामले की विभागीय जांच कराई जा रही है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि दोनों मामलों को गंभीरता से लिया गया है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। विभाग का कहना है कि शिक्षक समाज के आदर्श होते हैं और उनके आचरण से शिक्षा व्यवस्था की साख जुड़ी होती है।
ऐसे में सेवा नियमों के उल्लंघन या अनुशासनहीनता के किसी भी मामले में लापरवाही नहीं बरती जाएगी। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने सरकारी स्कूलों में निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अभिभावकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि केवल शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने की योजनाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि शिक्षकों की जवाबदेही सुनिश्चित करना और स्कूलों में नियमित निगरानी भी उतनी ही जरूरी है। फिलहाल दोनों मामलों की जांच जारी है। शिक्षा विभाग का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी। वहीं अभिभावकों की उम्मीद है कि इस तरह की घटनाओं पर सख्ती से कार्रवाई कर सरकारी स्कूलों की गरिमा और लोगों का भरोसा कायम रखा जाएगा।

