बिलासपुर 25 जून 2026। छत्तीसगढ़ में एंटी करप्शन ब्यूरो की लगातार कार्रवाई के बावजूद सरकारी दफ्तरों में रिश्वतखोरी का खेल थमता नजर नहीं आ रहा है। खासकर राजस्व विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आए दिन पटवारी, राजस्व निरीक्षक और अन्य कर्मचारी रिश्वत लेते पकड़े जा रहे हैं। बावजूद इसके व्यवस्था में सुधार दिखाई नहीं दे रहा। ताजा मामला बिलासपुर जिले का है, जहां एसीबी की टीम ने राजस्व विभाग के पटवारी और बिजली विभाग के एक बाबू का रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है।
जानकारी के मुताबिक एसीबी की टीम ने गुरूवार को न्यायधानी बिलासपुर में दो विभागों में छापामार कार्रवाई की। पहला मामला रतनपुर क्षेत्र का है। यहां के लालपुर हल्का में पदस्थ पटवारी भानु चंद्राकर को 25 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि जमीन के नक्शा बटांकन के लिए पटवारी ने पहले 40 हजार रुपये की मांग की थी, जो बाद में 25 हजार रुपये में तय हुई। शिकायतकर्ता की सूचना पर एसीबी ने जाल बिछाया और रकम लेते पटवारी को रंगे हाथों दबोच लिया। दूसरे मामले में मस्तूरी स्थित सीएसपीडीसीएल कार्यालय में पदस्थ बाबू सहदेव कुमार चंद्रा को 10 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया।
आरोप है कि कृषि भूमि तक निःशुल्क विद्युत लाइन और पोल लगाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के एवज में सीएसपीडीसीएल कार्यालय में पदस्थ बाबू सहदेव कुमार चंद्रा ने रिश्वत मांगी थी। किसान की शिकायत के बाद एसीबी की टीम बिजली आफिस पहुंची। जहां किसान से पैसा लेते सीएसपीडीसीएल के बाबू को टीम ने रंगे हाथों पकड़ लिया। दोनों मामलों में एसीबी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
बड़ा सवाल….आखिर कब रुकेगा रिश्वत का यह सिलसिला ?
प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान एसीबी ने दर्जनों पटवारियों, राजस्व निरीक्षकों और अन्य कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। बावजूद इसके राजस्व विभाग में भ्रष्टाचार के मामलों में अपेक्षित कमी नहीं आ रही है। आम नागरिकों को जमीन नामांतरण, सीमांकन, बटांकन और रिकॉर्ड दुरुस्ती जैसे सामान्य कार्यों के लिए भी रिश्वत मांगने की शिकायतें लगातार सामने आती रहती हैं। सवाल यह है कि जब लगातार गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई हो रही है, तो फिर कर्मचारियों में कानून का डर क्यों नहीं दिखाई दे रहा ?
क्या विभागीय निगरानी तंत्र कमजोर है या फिर भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि कार्रवाई का असर निचले स्तर तक नहीं पहुंच पा रहा ? एसीबी की ताजा कार्रवाई ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ केवल ट्रैप कार्रवाई ही नहीं, बल्कि विभागीय जवाबदेही और सख्त प्रशासनिक सुधारों की भी जरूरत है, ताकि आम नागरिकों को अपने ही अधिकारों के लिए रिश्वत न देनी पड़े।

