बिलासपुर 20 जून 2026। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की युक्तियुक्तकरण नीति के तहत किए गए शिक्षकों के स्थानांतरण को वैध ठहराते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी भी सरकारी कर्मचारी को अपनी पसंद के स्थान या जिले में पदस्थ रहने का कोई वैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है। हाईकोर्ट ने दो महिला व्याख्याताओं की रिट अपील खारिज करते हुए उनके स्थानांतरण आदेश को बरकरार रखा है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति स्वींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि स्थानांतरण सरकारी सेवा का अभिन्न हिस्सा है और केवल व्यक्तिगत पसंद के आधार पर किसी कर्मचारी को एक स्थान पर बने रहने का अधिकार नहीं दिया जा सकता। मामला मुंगेली और जांजगीर-चांपा जिले के शासकीय स्कूलों में पदस्थ वाणिज्य विषय की व्याख्याताओं शकुंतला राठौर और कृष्णा देवी साहू से संबंधित है। राज्य सरकार की युक्तियुक्तकरण नीति के तहत दोनों को 7 जून 2025 को अतिशेष घोषित किया गया था।
इसके बाद शिक्षा विभाग ने शकुंतला राठौर का स्थानांतरण शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय दशरंगपुर मुंगेली तथा कृष्णा देवी साहू का स्थानांतरण शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कोना मुंगेली में कर दिया था। याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दलील दी थी कि स्थानांतरण प्रक्रिया के दौरान आयोजित काउंसिलिंग में जांजगीर-चांपा जिले के रिक्त पदों की पूरी जानकारी प्रदर्शित नहीं की गई। उनका आरोप था कि कुछ विद्यालयों में एक स्वीकृत पद के विरुद्ध दो-दो वाणिज्य व्याख्याताओं की पदस्थापना की गई है, जिससे प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।
पहले भी नहीं मिली थी राहत
दोनों व्याख्याताओं ने पहले राज्य स्तरीय समिति के समक्ष अपनी शिकायत रखी थी, लेकिन वहां से राहत नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट की एकलपीठ में याचिका दायर की, जिसे खारिज कर दिया गया था। एकलपीठ के आदेश को चुनौती देते हुए उन्होंने खंडपीठ में रिट अपील दायर की थी। खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि युक्तियुक्तकरण नीति के तहत की गई कार्रवाई में हस्तक्षेप करने का कोई ठोस आधार नहीं पाया गया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकारी सेवा में स्थानांतरण एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है और कर्मचारी अपनी पसंद के स्थान पर बने रहने का कानूनी दावा नहीं कर सकते। अदालत ने यह भी कहा कि जब तक स्थानांतरण आदेश दुर्भावनापूर्ण, भेदभावपूर्ण या नियमों के विपरीत साबित नहीं होता, तब तक न्यायालय ऐसे मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगा।
कोर्ट ने तबादला आदेश रखा बरकरार
हाईकोर्ट ने एकलपीठ के फैसले को सही ठहराते हुए दोनों महिला व्याख्याताओं की रिट अपील खारिज कर दी और युक्तियुक्तकरण नीति के तहत जारी स्थानांतरण आदेश को यथावत बनाए रखा। राज्य में चल रही युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया को लेकर यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे स्थानांतरण संबंधी लंबित विवादों और भविष्य में दायर होने वाली याचिकाओं पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

