नई दिल्ली9 जुलाई 2026। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार ने सकारात्मक शुरुआत की। पिछले कारोबारी सत्र में भारी गिरावट के बाद निवेशकों की वापसी से बाजार में शुरुआती खरीदारी देखने को मिली। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 72 अंकों की बढ़त के साथ 76,571 पर खुला, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी-50 भी 46 अंक चढ़कर 23,928 के स्तर पर पहुंच गया। हालांकि, बुधवार को बाजार में जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली थी। सेंसेक्स 1,677 अंक लुढ़ककर 76,503.60 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 516.65 अंक टूटकर 23,882.05 के स्तर पर पहुंच गया था।
आज बाजार की नजर देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी TCS के पहली तिमाही के वित्तीय नतीजों पर टिकी है। निवेशकों को उम्मीद है कि इन नतीजों का असर पूरे आईटी सेक्टर के शेयरों पर देखने को मिलेगा। इस बीच एशियाई बाजारों से भी सकारात्मक संकेत मिले हैं। दक्षिण कोरिया का कोस्पी करीब 3.8 प्रतिशत की तेजी के साथ कारोबार कर रहा है। जापान का निक्केई 225 भी 2.3 प्रतिशत मजबूत हुआ, जबकि चीन का शंघाई कम्पोजिट भी बढ़त के साथ खुला। अमेरिकी टेक शेयरों में आई मजबूती का असर एशियाई बाजारों में भी देखने को मिला।
उधर, अमेरिकी बाजारों में बुधवार को मिला-जुला रुख रहा। डॉव जोंस और S&P 500 गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि नैस्डैक में टेक शेयरों की मजबूती के चलते हल्की बढ़त दर्ज की गई। Nvidia और Broadcom जैसे दिग्गज टेक शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। तनाव बढ़ने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में करीब 7 प्रतिशत तक उछाल आया। WTI क्रूड 74 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 78 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा है। तेल की कीमतों में तेजी का असर वैश्विक महंगाई और शेयर बाजार की चाल पर भी पड़ सकता है।
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अमेरिकी डॉलर भी मजबूत बना हुआ है। डॉलर के मुकाबले रुपया पिछले कारोबारी सत्र में 59 पैसे टूटकर 95.55 पर बंद हुआ था, जबकि गुरुवार को डॉलर 95.61 रुपये के स्तर पर कारोबार करता दिखा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है, तो तेल की कीमतों और डॉलर दोनों में और मजबूती देखने को मिल सकती है, जिसका असर भारतीय बाजार और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। फिलहाल निवेशकों की नजर TCS के तिमाही नतीजों, वैश्विक घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर बनी हुई है। यही कारक आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।

