रायपुर/रायलसीमा 5 अक्टूबर 2026। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के आंध्र प्रदेश के रायलसीमा क्षेत्र में एक कार्यक्रम के दौरान भीड़ के शोर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस जहां इस वीडियो को सरकार के खिलाफ जनता की नाराजगी से जोड़ रही है, वहीं भाजपा ने इसे जनता के उत्साह और भारी भीड़ के बीच हुआ क्षणिक व्यवधान बताते हुए कांग्रेस पर वीडियो को गलत संदर्भ में पेश करने का आरोप लगाया है। इसी वायरल वीडियो को छत्तीसगढ़ के पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने भी एक्स पर शेयर करते हुए केंद्र सरकार पर तंज कसा। उन्होंने लिखा, “निर्मला जी, विज्ञापन और जुमलों से बहुत कुछ ढका जा सकता है, जनता का सब्र नहीं।”
जब मोदी सरकार की वित्त मंत्री को मंच पर अपना भाषण बीच में रोकना पड़े और राज्य के मुख्यमंत्री जी को भीड़ से बार बार बैठने की अपील करनी पड़े, तो सवाल यह नहीं कि शोर किसने मचाया, सवाल यह है कि ऐसी नौबत आई क्यों। महंगाई, बेरोज़गारी और खाली वादों की मार जनता रोज़ झेल रही है, और अब वह नाराज़गी मंच के सामने तक पहुँचने लगी है।
निर्मला जी, विज्ञापन और जुमलों से बहुत कुछ ढका जा सकता है, जनता का सब्र नहीं।
— T S Singhdeo (@TS_SinghDeo) October 4, 2026
गौरतलब है कि वायरल वीडियो आंध्र प्रदेश के अन्नमय्या जिले के मदनपल्ले में 2 अक्टूबर 2026 को हुए एक बड़े विकास कार्यक्रम का है। इसमें केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण समेत अन्य नेता मौजूद थे। मदनपल्ले में 1 लाख करोड़ रूपये की लागत से ‘Global Horticulture Hub – Rayalaseema Rising’ परियोजना की आधारशिला रखी गई। इसके साथ Indian School of Agriculture की भी आधारशिला रखी गई। कार्यक्रम में रिलायंस इंडस्ट्रीज के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनंत अंबानी भी मौजूद थे। इस कार्यक्रम में निर्मला सीतारमण के भाषण के दौरान कुछ देर के लिए भीड़ की तरफ से शोर और नारेबाजी हुई। वीडियो में मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू भीड़ को शांत कराने और बैठने के लिए कहते दिखाई देते हैं। इसी करीब 30 सेकंड की क्लिप को सोशल मीडिया पर शेयर किया गया और दावा किया गया कि भीड़ ‘पहले नौकरी दो’ के नारे लगा रही थी।
सोशल मीडिया में वायरल इस वीडियों को लेकर कांग्रेस और बीजेपी अब अपने-अपने दावे कर रही है। इसी Video पर छत्तीसगढ़ के पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने केंद्र सरकार और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर हमला बोला है। उन्होने वायरल वीडियो को एक्स पर साझा करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि….“जब केंद्र की वित्त मंत्री को मंच पर अपना भाषण बीच में रोकना पड़े और मुख्यमंत्री को भीड़ से बार-बार बैठने की अपील करनी पड़े, तो सवाल यह नहीं है कि शोर किसने मचाया, बल्कि यह है कि ऐसी स्थिति क्यों बनी।” सिंहदेव ने महंगाई और बेरोजगारी को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि जनता रोज इन समस्याओं का सामना कर रही है और अब नाराजगी मंच तक पहुंचने लगी है। उन्होंने वित्त मंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि विज्ञापन और वादों से बहुत कुछ ढका जा सकता है, लेकिन जनता का सब्र नहीं।
सोशल मीडिया पर ‘पहले नौकरी दो’ के नारे का दावा
वायरल वीडियो के साथ कांग्रेस नेताओं की ओर से यह दावा किया जा रहा है कि रायलसीमा में निर्मला सीतारमण के भाषण के दौरान भीड़ की ओर से ‘पहले नौकरी दो’ के नारे लगाए गए। कांग्रेस की ओर से यह भी कहा गया कि शोर इतना बढ़ गया कि वित्त मंत्री को अपना भाषण रोकना पड़ा और मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू को लोगों से शांत रहने की अपील करनी पड़ी। हालांकि वीडियो के साथ किए जा रहे राजनीतिक दावों को लेकर तस्वीर पूरी तरह एकतरफा नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक आंध्र प्रदेश सरकार के मंत्री नारा लोकेश ने कांग्रेस के दावे को खारिज करते हुए इसे फेक न्यूज बताया है।
BJP ने कहा- जनता के उत्साह को कांग्रेस ने बताया आक्रोश
भाजपा ने भी उसी वीडियो को अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर साझा करते हुए कांग्रेस पर पलटवार किया। भाजपा का कहना है कि कार्यक्रम में NDA सरकार के सुशासन के प्रति जनता का समर्थन और उत्साह दिखाई दे रहा था। पार्टी ने दावा किया कि भारी भीड़ को संभालने के दौरान कार्यक्रम में थोड़ी देर के लिए व्यवधान आया, जिसे कांग्रेस ने जानबूझकर ‘जनता का आक्रोश’ बताने की कोशिश की। भाजपा के मुताबिक कांग्रेस का सोशल मीडिया नैरेटिव जमीन पर मौजूद तस्वीर को नहीं बदल सकता और कार्यक्रम में लोगों का उत्साह साफ दिखाई दे रहा था।
कांग्रेस की सोच का जवाब नहीं: इतनी बौखलायी हुई है कि जनता के उत्साह को भी विवाद का रंग दे दिया! 😂
NDA सरकार के सुशासन के प्रति उमड़े अपार जनसमर्थन को “जनता का आक्रोश” बताने की कोशिश की जा रही है, और भारी भीड़ को संभालने के लिए कार्यक्रम में आई क्षणिक रुकावट को भी जानबूझकर गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। लेकिन कांग्रेसी दुष्प्रचार से जमीन पर हुई हकीकत नहीं बदली जा सकती।
जनता का उत्साह सबके सामने था और साफ दिखाई दे रहा था।
— BJP (@BJP4India) October 4, 2026
एक वीडियो, दो दावे और देश के सियासी मूड पर बहस
इस पूरे विवाद में सबसे अहम बात यह है कि एक ही वीडियो को कांग्रेस और भाजपा अलग-अलग राजनीतिक नजरिए से देख रहे हैं। कांग्रेस इसे बेरोजगारी और महंगाई से जुड़ी जनता की नाराजगी का संकेत बता रही है, जबकि भाजपा इसे समर्थकों की भारी भीड़ के कारण पैदा हुई अव्यवस्था बता रही है। देश की राजनीति में रोजगार, महंगाई और आर्थिक अवसर लगातार महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं। ऐसे में किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में भीड़ की प्रतिक्रिया को राजनीतिक दल अपने-अपने नैरेटिव के समर्थन में पेश कर रहे हैं।
लेकिन किसी एक वायरल वीडियो को पूरे देश के राजनीतिक मूड का निर्णायक प्रमाण मानना उचित नहीं होगा। फिलहाल रायलसीमा का यह वीडियो सोशल मीडिया पर राजनीतिक नैरेटिव की नई लड़ाई का केंद्र बन गया है। कांग्रेस के आरोप और भाजपा के दावे के बीच वास्तविक सवाल यही है कि कार्यक्रम में शोर का वास्तविक कारण क्या था और वायरल वीडियो में दिखाई दे रही घटना का पूरा संदर्भ क्या है। उपलब्ध रिपोर्टों में कांग्रेस के ‘पहले नौकरी दो’ वाले दावे के साथ सरकार की ओर से खंडन भी सामने आया है।


