भोपाल 4 नवंबर 2026। मध्यप्रदेश में जहरीली शराब से हो रही मौतों और अवैध शराब के कारोबार पर नियंत्रण को लेकर एक बार फिर सवाल उठे हैं। इसी बीच 2014 बैच के IPS अधिकारी अनुराग सुजानिया के इस्तीफे ने पुलिस महकमे में हलचल बढ़ा दी है। सुजानिया ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने इसके पीछे व्यक्तिगत कारण बताए हैं। हालांकि, उनके इस्तीफे को सागर में जहरीली शराब से 22 लोगों की मौत के बाद SP पद से हटाए जाने की कार्रवाई से जोड़कर भी देखा जा रहा है। अनुराग सुजानिया करीब छह महीने पहले सागर के पुलिस अधीक्षक बनाए गए थे। जहरीली शराब से 22 लोगों की मौत के बाद उन्हें इस पद से हटा दिया गया था। इसके बाद चार दिन पहले ही सरकार ने उन्हें पुलिस मुख्यालय में AIG की जिम्मेदारी सौंपी थी। नई पोस्टिंग के कुछ ही दिनों बाद उनके इस्तीफे की खबर सामने आई है।
गौरतलब है कि सागर में जहरीली शराब से 22 लोगों की मौत के मामले ने पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े किए थे। अवैध शराब की बिक्री और उसकी रोकथाम में संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी को लेकर भी चर्चा हुई थी। इसी घटनाक्रम के बाद सुजानिया को सागर SP के पद से हटाया गया। अब उनके इस्तीफे के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या सागर की घटना के बाद हुई कार्रवाई का उनके फैसले पर कोई असर पड़ा ? हालांकि, इस्तीफे में उन्होंने व्यक्तिगत कारणों का उल्लेख किया है। इसलिए इसे सीधे तौर पर सागर से हटाए जाने की कार्रवाई का नतीजा बताने की पुष्टि नहीं हुई है। सुजानिया का इस्तीफा स्वीकार किया जाएगा या नहीं, इस पर सरकार ने अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है।
IPS ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष चंचल शेखर ने इस घटनाक्रम की जानकारी होने से इनकार किया है। बताया जा रहा है कि मंगलवार सुबह मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के भौंरी पहुंचने पर IPS एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने उनसे इस मामले पर चर्चा की। इसके बाद पुलिस मुख्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की बात भी सामने आई।
मुख्यमंत्री ने अवैध शराब पर सख्ती के दिए निर्देश
इस बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को सीएम हाउस में पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने शराब तस्करी और अवैध कारोबार पर प्रभावी रोक लगाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि शराब माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और अवैध शराब का कारोबार सामने आने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय हो। मुख्यमंत्री ने शराब दुकानों की नियमित जांच, जिलों में वाहनों की चेकिंग बढ़ाने और सीमावर्ती जिलों में विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। शराब दुकानों की निगरानी में पुलिस और आबकारी विभाग के बीच समन्वय बनाने पर भी जोर दिया गया।
मध्यप्रदेश में जहरीली शराब से मौतों की घटनाएं केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं हैं, बल्कि अवैध कारोबार पर प्रशासनिक नियंत्रण और अधिकारियों की जवाबदेही से भी जुड़ी हैं। सागर में 22 लोगों की मौत के बाद एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को पद से हटाया गया। अब उसी अधिकारी के इस्तीफे ने इस पूरे घटनाक्रम को फिर चर्चा में ला दिया है। बड़ा सवाल यह है कि जहरीली शराब का कारोबार लोगों की जान लेने से पहले क्यों नहीं रोका जा पाता? कार्रवाई के बाद अधिकारियों को हटाना ही पर्याप्त है या उन परिस्थितियों की भी जांच होनी चाहिए, जिनमें ऐसा अवैध कारोबार चलता रहता है? फिलहाल सुजानिया के इस्तीफे पर सरकार का फैसला और अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई का अगला कदम महत्वपूर्ण होगा।


