रायपुर18 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग में फर्जी तबादला आदेश जारी करने का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है। विभागीय लेटरहेड, मंत्रालय की कथित फर्जी सील और अवर सचिव आरपी वर्मा के जाली हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर 19 शिक्षकों और कर्मचारियों के तबादले के आदेश जारी किए जाने का खुलासा हुआ है। मामले को गंभीरता से लेते हुए लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने जांच शुरू कर दी है। वहीं, संबंधित 15 जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) से तीन दिन के भीतर जवाब मांगा गया है।
जानकारी के अनुसार कथित फर्जी तबादला सूची में सहायक शिक्षक, व्याख्याता, प्रधान पाठक और व्यायाम शिक्षक सहित विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारियों के नाम शामिल हैं। इन कर्मचारियों को उनकी पसंद की जगहों पर स्थानांतरित किए जाने का उल्लेख किया गया है। हैरानी की बात यह है कि सूची में शामिल कर्मचारियों से संबंधित 15 जिलों के शिक्षा अधिकारियों तक को इन तबादलों की भनक नहीं लगी। मामला उजागर होने के बाद विभागीय स्तर पर जांच की कार्रवाई तेज कर दी गई है।
DEO को तीन दिन का अल्टीमेटम, तीन सवालों के जवाब मांगे
DPI ने संबंधित जिलों के DEO को तीन दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों से पूछा गया है कि फर्जी आदेश उनके कार्यालय तक कैसे पहुंचा और उसके आधार पर क्या कार्रवाई की गई। रिपोर्ट में इन तीन बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई है:
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आदेश कहां से आया ? फर्जी तबादला आदेश किस माध्यम से जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय तक पहुंचा ?
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कितनों को मिली रिलीविंग-जॉइनिंग ? आदेश के आधार पर कितने कर्मचारियों ने कार्यमुक्ति या कार्यभार ग्रहण करने के लिए आवेदन दिया और कितनों को रिलीव या जॉइन कराया गया ?
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फर्जीवाड़े पर क्या कार्रवाई हुई? मामले की जानकारी मिलने के बाद जिला स्तर पर क्या कदम उठाए गए ?
रिपोर्ट मांगे गए जिलों में रायपुर, दुर्ग, बेमेतरा, बलौदाबाजार, बस्तर, सारंगढ़-बिलाईगढ़, राजनांदगांव, कांकेर, कबीरधाम, बालोद, धमतरी, सरगुजा, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, बलरामपुर-रामानुजगंज और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई शामिल हैं। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि मंत्रालय के आदेश का सत्यापन किए बिना संबंधित कार्यालयों में तबादले की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ी।
यदि फर्जी आदेश के आधार पर किसी कर्मचारी को कार्यमुक्त किया गया या नई जगह पर कार्यभार ग्रहण कराया गया, तो संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। शासन को आशंका है कि कुछ कर्मचारियों ने कथित सिंडिकेट से सांठगांठ कर या अनुचित माध्यमों से ये आदेश तैयार करवाए होंगे। हालांकि, फर्जीवाड़े में किसकी भूमिका रही और किन कर्मचारियों को इसका लाभ मिला, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
पहली बार नहीं हुआ ऐसा मामला, 2020 में भी सामने आया था फर्जीवाड़ा
स्कूल शिक्षा विभाग में फर्जी तबादला आदेश जारी होने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले 30 मार्च 2020 को तत्कालीन अवर सचिव जनक कुमार के नाम से 21 व्याख्याताओं, शिक्षकों और एक क्लर्क के तबादले का कथित फर्जी आदेश जारी हुआ था। उस सूची में व्याख्याता, शिक्षक एलबी और सहायक ग्रेड-2 के कर्मचारियों के नाम शामिल थे। इनमें बस्तर के कई शिक्षक और महिला शिक्षक भी बताए गए थे, जिन्हें बालोद, रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग सहित अन्य स्थानों पर भेजने का उल्लेख था। मामला सामने आने के बाद तत्कालीन अवर सचिव ने नवा रायपुर के राखी थाने में लिखित शिकायत दी थी।
ताजा मामले में शासन के निर्देश पर कथित फर्जीवाड़े में संलिप्त पाए जाने वाले शासकीय सेवकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। अब जांच में यह पता लगाया जाएगा कि जाली आदेश किसने तैयार किए, उन्हें किन माध्यमों से जिलों तक पहुंचाया गया और क्या उनके आधार पर कर्मचारियों की रिलीविंग या जॉइनिंग कराई गई। जांच रिपोर्ट के बाद ही पूरे नेटवर्क और जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, 15 जिलों के DEO की रिपोर्ट पर विभाग की नजर है।


