रायपुर 9 अक्टूबर 2026। दिल्ली में 10 अक्टूबर को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले मेट्रो और रेल सेवाओं पर पाबंदियों को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। छत्तीसगढ़ के पूर्व उप-मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने इन प्रतिबंधों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए देश में ‘अघोषित आपातकाल’ होने का आरोप लगाया है। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की जवाबदेही और नियुक्ति प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। सिंहदेव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी पोस्ट में आरोप लगाया कि….”शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने की कोशिश कर रहे लोगों की आवाज दबाई जा रही है।” उन्होंने सवाल किया कि…आखिर किसे बचाने के लिए लोकतांत्रिक व्यवस्था को बंधक बनाया जा रहा है ?
देश में आज अघोषित आपातकाल है।
सांसद संविधान की प्रति लेकर निकलते हैं, तो उन्हें रास्ते में रोक दिया जाता है। जनता शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज़ उठाना चाहती है, तो उसे दबाने की कोशिश होती है। ट्रेनें रद्द की जा रही हैं, यात्रियों को सफ़र के बीच में उतारा जा रहा है, दिल्ली मेट्रो के स्टेशन बंद किए जा रहे हैं और पुलिस लोगों को उनके घरों में नज़रबंद कर रही है।
आख़िर किसे बचाने के लिए पूरे लोकतंत्र को बंधक बनाया जा रहा है? ज्ञानेश कुमार को जवाबदेही से?
वो ज्ञानेश कुमार जिसकी नियुक्ति में सत्ता का बहुमत, जवाबदेही पर कानूनी सुरक्षा और जिससे सवाल पूछने वालों पर पुलिस का पहरा!
साफ है – संवैधानिक रूप से न सही लेकिन भ्रष्टाचार और वोट चोरी के माध्यम से ज्ञानेश कुमार और BJP एक दूसरे के रक्षा कवच हैं।
ज्ञानेश कुमार जी को जाना होगा – सत्ता चाहे जितनी ताक़त लगा ले, संविधान से ऊपर कोई नहीं हो सकता। न प्रधानमंत्री, न सरकार और न ही कोई संवैधानिक पदाधिकारी।
— T S Singhdeo (@TS_SinghDeo) October 9, 2026
टीएस सिंहदेव ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि अलग-अलग राज्यों से दिल्ली आने वाली ट्रेनें रद्द की जा रही हैं, यात्रियों को सफर के बीच में उतारा जा रहा है और दिल्ली मेट्रो के कुछ स्टेशन बंद किए जा रहे हैं। उन्होंने पुलिस पर लोगों को घरों में नजरबंद करने का आरोप भी लगाया। सिंहदेव के मुताबिक, शांतिपूर्ण प्रदर्शन और अपनी बात रखने का अधिकार लोकतंत्र का अहम हिस्सा है। उन्होंने कहा कि विरोध की आवाज को रोकने के लिए प्रतिबंधों का इस्तेमाल करना गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि, ट्रेनों के रद्द होने, यात्रियों को रास्ते में उतारे जाने और लोगों को नजरबंद किए जाने के दावों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित आधिकारिक सूचनाओं से किया जाना जरूरी है।
अपने बयान में सिंहदेव ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति प्रक्रिया और जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था में सत्ता के बहुमत और कानूनी संरक्षण के कारण जवाबदेही प्रभावित हो रही है। सिंहदेव ने भाजपा और ज्ञानेश कुमार के बीच कथित राजनीतिक संरक्षण का आरोप लगाते हुए ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि संविधान से ऊपर कोई नहीं है—न प्रधानमंत्री, न सरकार और न ही कोई संवैधानिक पदाधिकारी। ये सिंहदेव के राजनीतिक आरोप हैं। इन आरोपों के समर्थन में स्वतंत्र साक्ष्य और संबंधित पक्षों का जवाब इस विवाद को समझने के लिए महत्वपूर्ण होगा।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद बहस तेज
दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले आवाजाही पर पाबंदियों का मुद्दा कानूनी और राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से आवाजाही नियंत्रित करने के अधिकार के साथ आम लोगों की सुविधा का ध्यान रखने की जरूरत पर जताई गई चिंता ने इस सवाल को और अहम बना दिया है कि सुरक्षा व्यवस्था और नागरिकों के अधिकारों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। प्रशासन के पास कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार है, लेकिन शांतिपूर्ण विरोध और आम लोगों की आवाजाही पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। दिल्ली में 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले अब निगाहें प्रशासनिक पाबंदियों, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं पर हैं। सिंहदेव के बयान ने इस विवाद को छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी चर्चा का विषय बना दिया है।


