कोरबा 4 अगस्त 2026। कोरबा में बालको वेदांता की कथित जनविरोधी नीतियों और जर्जर सड़क-पुल के मुद्दे को लेकर राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। मंगलवार को युवा कांग्रेस और एनएसयूआई ने संयुक्त रूप से आर्थिक नाकेबंदी करते हुए बालको क्षेत्र में कोयला और राखड़ परिवहन को रोककर चक्काजाम किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उद्योग से करोड़ों रुपये का कारोबार होने के बावजूद स्थानीय बुनियादी सुविधाओं की लगातार अनदेखी की जा रही है।
प्रदर्शन के दौरान युवा कांग्रेस के जिला महामंत्री मधुसूदन दास ने कहा कि क्षेत्र की जनता वर्षों से टूटी सड़कों, जर्जर पुल और लगातार हो रहे सड़क हादसों की परेशानी झेल रही है, लेकिन बालको वेदांता अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि उद्योगों का संचालन जनता की सुरक्षा और जीवन से समझौता करके नहीं किया जा सकता। स्थानीय लोगों के लिए सुरक्षित सड़क और मजबूत पुल उनका अधिकार है। एनएसयूआई के जिला उपाध्यक्ष आकाश राज ने कहा कि केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा।
उन्होंने मांग की कि सड़क और पुल निर्माण का काम जल्द शुरू किया जाए। उनका कहना था कि यदि तय समय में कार्य शुरू नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा। वहीं, एनएसयूआई के ग्रामीण जिला अध्यक्ष मनमोहन राठौर और शहर जिला अध्यक्ष दीपक कुमार वर्मा ने भी बालको प्रबंधन से जर्जर सड़क और क्षतिग्रस्त पुल का तत्काल निर्माण कराने तथा सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करने की मांग की। नेताओं ने कहा कि यह फिलहाल सांकेतिक प्रदर्शन है, लेकिन यदि मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आने वाले दिनों में हजारों कार्यकर्ता बालको के तीनों प्रवेश द्वारों पर बड़ा आंदोलन करेंगे।
इस प्रदर्शन में अंकित श्रीवास्तव, अदनान मेमन, धर्मेंद्र चोटोले, सीताराम चौहान, अखिलेश त्रिपाठी, संजय कंवर, भागीरथी यादव, शैलेन्द्र कुर्रे, मोहम्मद इमरान, दीपक दास महंत, अनिल खूंटे, अल्तमस, रवि सोनी, प्रहलाद साहू, शिवचरण, दिवाकर राजपूत, अनिकेत यादव, नफीस मेमन, संजय कुमार पटेल, दिनेश यादव, मयंक अग्रवाल, प्रकाश साहू सहित बड़ी संख्या में युवा कांग्रेस और एनएसयूआई कार्यकर्ता मौजूद रहे। बालको प्रबंधन की ओर से इस प्रदर्शन और लगाए गए आरोपों पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में अब नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनी इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है और प्रस्तावित बड़े आंदोलन से पहले कोई समाधान निकलता है या नहीं।

