रायपुर 27 अक्टूबर 2026। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय बताए जा रहे चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के संभावित असर को देखते हुए छत्तीसगढ़ में प्रशासन ने अलर्ट जारी कर राहत और बचाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक आज 27 और 28 अक्टूबर को प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश, तेज हवाएं और बिजली गिरने की आशंका है। दक्षिण छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में मंगलवार से मौसम का असर दिखने की संभावना जताई गई है, जबकि 28 अक्टूबर को दक्षिण और मध्य छत्तीसगढ़ में भारी बारिश का अनुमान है। प्रशासन ने 12 अति संवेदनशील जिलों में विशेष तैयारी की है। राज्यभर में 779 राहत शिविर तैयार रखे गए हैं, जहां करीब एक लाख लोगों के ठहरने की व्यवस्था बताई गई है। जरूरत पड़ने पर प्रभावित इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाएगा।
गौरतलब है कि बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती तूफान ‘अर्नब‘ को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार अलर्ट मोड पर है। इस चक्रवाती तूफान के असर को देखते हुए राज्य स्तर पर प्रशासनिक अधिकारियों को विशेष निर्देश जारी किये गये है। इसके साथ ही तूफान से सर्वाधिक प्रभावित होने वाले जिलों में स्कूलों की छुट्टी करने के साथ ही प्रशासनिक अमले को आपदा-प्रबंधन के लिए अलर्ट रहने का निर्देश दिया गया है। राज्य सरकार की कार्ययोजना के अनुसार, सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, कोंडागांव, बस्तर, कांकेर, धमतरी, महासमुंद, गरियाबंद, बालोद और रायपुर को अति संवेदनशील जिलों में शामिल किया गया है। इन जिलों में भारी बारिश और तेज हवाओं के संभावित असर को देखते हुए प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 28 अक्टूबर को दक्षिण और मध्य छत्तीसगढ़ में भारी से अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है। 29 अक्टूबर को उत्तर छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में भी बारिश का प्रभाव बढ़ने की आशंका है।
779 राहत शिविर तैयार, करीब एक लाख लोगों के ठहरने की व्यवस्था
चक्रवात के संभावित असर से निपटने के लिए सरकार ने प्रदेशभर में 779 राहत शिविर तैयार रखने की योजना बनाई है। इनमें 12 संवेदनशील जिलों में 341 और शेष जिलों में 438 शिविर शामिल हैं। इन शिविरों में करीब एक लाख लोगों को ठहराने की क्षमता बताई गई है। प्रशासन को शिविरों में पीने का पानी, भोजन, दवाइयां और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर प्रभावित गांवों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाएगा। गर्भवती महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगों को सुरक्षित निकालने में प्राथमिकता देने की तैयारी है।
SDRF की 7 टीमें तैयार, NDRF भी संभालेगी मोर्चा
आपदा प्रबंधन के लिए राज्य में SDRF की सात टीमें तैयार रखी गई हैं। प्रत्येक टीम में 36 जवान बताए गए हैं। इनकी तैनाती रायपुर, बिलासपुर, जगदलपुर, दुर्ग और अंबिकापुर सहित प्रमुख स्थानों पर की जा रही है। दुर्ग में NDRF की एक टीम पहले से मौजूद है। इसके अलावा सुकमा, बस्तर और बीजापुर में भी NDRF की टीमें तैनात करने की तैयारी है। राज्य सरकार ने संभावित आपदा से निपटने के लिए राहत और बचाव दलों को तैयार रखने की जानकारी दी है। इसके साथ ही नगर सेना के 828 प्रशिक्षित जवानों और 3,895 आपदा मित्रों को भी जरूरत के मुताबिक राहत कार्यों में लगाया जा सकता है। बचाव अभियान के लिए रबर बोट, हाइड्रोलिक कटर और पानी के भीतर देखने वाले कैमरों सहित उपकरण तैयार रखने की योजना है।
बारिश और बाढ़ की स्थिति में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों, इसके लिए अस्पतालों को भी अलर्ट पर रखा गया है। कार्ययोजना के अनुसार, 12 संवेदनशील जिलों के जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त दवाइयां तथा चिकित्सा कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है। अन्य जिलों में भी स्वास्थ्य संस्थानों को आपात स्थिति के लिए तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। पशुओं की देखभाल और टीकाकरण के लिए पशु चिकित्सा सेवाओं को सक्रिय रखने की योजना है।
24 घंटे कंट्रोल रूम, हेल्पलाइन नंबर 1070 जारी
आपदा की स्थिति में लोगों की मदद के लिए राज्य स्तर पर बाढ़ नियंत्रण कक्ष को 24 घंटे सक्रिय रखने की व्यवस्था की गई है। जरूरत पड़ने पर नागरिक टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1070 पर संपर्क कर सकते हैं। जिला प्रशासन को कंट्रोल रूम में कर्मचारियों की ड्यूटी तय करने और संपर्क नंबरों का प्रचार करने के निर्देश दिए गए हैं। नदियों के जलस्तर पर नजर रखने के साथ बांधों से पानी छोड़े जाने की संभावित स्थिति में संबंधित विभागों के बीच समन्वय बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है।
बाढ़ में फंसे लोगों को हेलीकॉप्टर से निकालने की तैयारी
भारी बारिश से नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने या गांवों में बाढ़ का पानी भरने की स्थिति में जरूरत के अनुसार हेलीकॉप्टर से बचाव अभियान चलाने की तैयारी है। इसके लिए रायपुर और बस्तर में उपलब्ध हेलीकॉप्टर बेस से समन्वय किया गया है। प्रशासन को नदी, नालों, पुल-पुलियों और जलमग्न सड़कों पर आवाजाही रोकने तथा लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। राहत शिविरों में भोजन, स्वच्छ पेयजल और इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है। चक्रवात के असर से फसलों को संभावित नुकसान को देखते हुए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने किसानों के लिए मौसम आधारित सलाह जारी की है।
किसानों को अगले दो से चार दिनों तक धान और दूसरी फसलों की कटाई रोकने तथा पहले से काटी गई उपज को सुरक्षित स्थान पर रखने की सलाह दी गई है। खेतों में जलभराव से बचने के लिए पानी निकासी की व्यवस्था करने को भी कहा गया है। लगातार बारिश होने की स्थिति में धान सहित अन्य फसलों को नुकसान पहुंच सकता है, इसलिए किसानों को स्थानीय मौसम चेतावनियों पर नजर रखने की जरूरत है। चक्रवात के संभावित असर को देखते हुए दंतेवाड़ा जिले में 28 अक्टूबर को स्कूलों में छुट्टी घोषित किए जाने की जानकारी भी दी गई है।
तूफान के बाद नुकसान का सर्वे, सड़क और बिजली बहाली की तैयारी
सरकार की कार्ययोजना में चक्रवात का असर कम होने के बाद नुकसान का आकलन करने की तैयारी भी शामिल है। राजस्व, कृषि, पंचायत, पशुपालन, नगरीय प्रशासन और लोक निर्माण सहित संबंधित विभागों को मकानों, फसलों, पशुओं और बुनियादी सुविधाओं को हुए नुकसान का सर्वे करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रभावित इलाकों में पेयजल की गुणवत्ता की जांच, सफाई, बीमारियों की निगरानी और मृत पशुओं के सुरक्षित निपटान की व्यवस्था भी की जाएगी। क्षतिग्रस्त सड़कों, पुल-पुलियों और तटबंधों की मरम्मत के साथ बिजली तथा दूरसंचार सेवाओं को बहाल करने पर ध्यान दिया जाएगा।
फिलहाल, छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा सतर्कता दक्षिण बस्तर और मध्य छत्तीसगढ़ के संभावित प्रभावित इलाकों को लेकर है। अगले दो दिनों में बारिश की वास्तविक तीव्रता और जिलेवार प्रभाव मौसम विभाग के अपडेट पर निर्भर करेगा। लोगों को सलाह है कि वे स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें, उफनते नदी-नालों को पार न करें और खराब मौसम में अनावश्यक यात्रा से बचें।


