रायपुर 24 सितंबर 2026। मंत्रालय के कर्मचारियों को लाने-ले जाने वाली बसों की बदहाल स्थिति को लेकर गुरुवार को कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा। बुधवार को मंत्रालय की बस में आग लगने की घटना के बाद कर्मचारियों ने मेन गेट पर प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने बसों के नियमित मेंटेनेंस, सुरक्षा जांच और जर्जर बसों को हटाने की मांग की। इस दौरान कर्मचारियों ने ‘रघुपति राघव राजा राम’ गाकर विरोध जताया।
गौरतलब है कि बुधवार शाम मंत्रालय से करीब 35 कर्मचारियों को लेकर रायपुर के कबीर नगर जा रही सिटी बस में अचानक आग लग गई थी। बस रवाना होने के दौरान ही उसके निचले हिस्से से धुआं उठने लगा। कुछ ही देर में धुआं आग की लपटों में बदल गया। बस में सवार कर्मचारियों ने तत्काल बाहर निकलकर अपनी जान बचाई। करीब 20 मिनट में बस लगभग पूरी तरह जल गई। गनीमत रही कि घटना में किसी कर्मचारी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
कर्मचारियों का आरोप है कि जिस बस में दर्जनों कर्मचारी सफर कर रहे थे, उसमें आग बुझाने के लिए फायर एक्सटिंग्विशर तक उपलब्ध नहीं था। आग लगने के बाद मंत्रालय परिसर में रखे 10.10 किलो क्षमता वाले दो फायर एक्सटिंग्विशर लाकर आग बुझाने की कोशिश की गई। बाद में दमकल की टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया। प्रारंभिक तौर पर आग लगने की वजह शार्ट सर्किट बताई जा रही है। हालांकि, आग लगने के वास्तविक कारण की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
14 साल पुरानी बसों के भरोसे कर्मचारी
कर्मचारियों का कहना है कि मंत्रालय की कई बसें करीब 14 साल पुरानी हैं और उनकी हालत खराब है। कई बसों की छत से बारिश का पानी टपकता है। सीटें भीगने के कारण यात्रियों को पॉलीथिन बिछाकर बैठना पड़ता है। कई बसों के दरवाजे ठीक से बंद नहीं होते, जबकि फ्लोर भी जर्जर स्थिति में है। कर्मचारियों के मुताबिक कई बार बसें रास्ते में खराब हो जाती हैं। इन समस्याओं को लेकर कर्मचारी संघ लंबे समय से संबंधित अधिकारियों के सामने मुद्दा उठाता रहा है।
मंत्रालय कर्मचारियों के परिवहन के लिए रायपुर नगर निगम ने वर्ष 2012 में श्रीदुर्गा मां ट्रांसपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड को 98 बसों के संचालन का ठेका दिया था। यह ठेका 10 साल के लिए था, जिसकी अवधि वर्ष 2022 में समाप्त हो गई। इसके बाद एग्रीमेंट बढ़ाया गया।बताया गया कि एजेंसी की कई बसें अब 15 साल की अवधि पूरी करने के करीब हैं। पांच बसें ऑफरोड हो चुकी हैं और वर्तमान में 83 बसों का संचालन किया जा रहा है।
एडिशनल कमिश्नर लोकेश्वर साहू के मुताबिक निगम की ओर से संचालित बसें कंडम हो चुकी हैं। बस सेवा बंद करने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। उन्होंने बताया कि 31 अक्टूबर से इन बसों का संचालन बंद कर दिया जाएगा। हालांकि कर्मचारियों का सवाल है कि जब बसों की स्थिति इतनी खराब है और एक बस में आग लगने जैसी घटना हो चुकी है, तो 31 अक्टूबर तक कर्मचारियों की सुरक्षित यात्रा के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी?
बुधवार की घटना के बाद कर्मचारियों के प्रदर्शन ने मंत्रालय की परिवहन व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। बसों की नियमित जांच, फायर सेफ्टी उपकरण और समय पर मेंटेनेंस की व्यवस्था सुनिश्चित करना जरूरी है। अब सवाल यह है कि क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही परिवहन व्यवस्था में बदलाव होगा या 31 अक्टूबर तक कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी?


