कोरबा 4 नवंबर 2026। औद्योगिक नगरी के नाम से मशहूर कोरबा जिले में सड़क हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को दो अलग-अलग दुर्घटनाओं में तीन लोगों की जान चली गई। कुसमुंडा में बाइक और एक्टिवा की टक्कर के बाद सड़क पर गिरे युवक और युवती को पीछे से आ रहे ट्रक ने कुचल दिया। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, उरगा थाना क्षेत्र में ट्रेलर की चपेट में आने से स्कूटी सवार बुजुर्ग की जान चली गई। लगातार हो रहे इन हादसों ने जिले की यातायात व्यवस्था और सड़क सुरक्षा के इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर उन औद्योगिक मार्गों पर, जहां कोयला परिवहन और भारी वाहनों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। सवाल यह है कि सड़क सुरक्षा के लिए जागरूकता अभियान चलाने के बावजूद हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम कितने प्रभावी हैं ?
पहली घटना बुधवार सुबह कुसमुंडा थाना क्षेत्र की है। जानकारी के मुताबिक, बाइक सवार युवक और एक्टिवा सवार युवती के बीच आमने-सामने टक्कर हो गई। टक्कर के बाद दोनों सड़क पर गिर पड़े। इसी दौरान पीछे से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने दोनों को कुचल दिया। हादसे के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। राहगीरों ने 112 और संजीवनी वाहन को सूचना दी। कुसमुंडा पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को कब्जे में लेकर जांच शुरू की। पुलिस के मुताबिक, मृतक स्थानीय क्षेत्र के निवासी बताए जा रहे हैं। उनकी पहचान की पुष्टि की जा रही है। हादसे के बाद ट्रक चालक मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश की जा रही है।
उरगा में ट्रेलर की चपेट में आए बुजुर्ग
दूसरा हादसा उरगा थाना क्षेत्र में हुआ। पुलिस के अनुसार, सेमीपाली निवासी कृति नायडू निजी काम से उरगा चौक आए थे। काम पूरा करने के बाद वह स्कूटी से अपने गांव लौट रहे थे। इसी दौरान पीछे से आ रहे ट्रेलर ने उनकी स्कूटी को टक्कर मार दी। टक्कर के बाद वह सड़क पर गिर गए और ट्रेलर का पिछला पहिया उनके ऊपर से गुजर गया। इससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ट्रेलर की रफ्तार तेज थी। चालक ने मौके से भागने की कोशिश की, लेकिन स्थानीय लोगों की मदद से उसे पकड़ लिया गया। पुलिस ने ट्रेलर जब्त कर चालक से पूछताछ शुरू कर दी है।
भारी वाहनों की आवाजाही के बीच सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
कुसमुंडा-गेवरा मुख्य मार्ग कोरबा के प्रमुख औद्योगिक मार्गों में शामिल है। इस रास्ते पर कोयला परिवहन और अन्य भारी वाहनों की लगातार आवाजाही रहती है। सड़क किनारे बेतरतीब तरीके से खड़े वाहन और भारी ट्रैफिक दोपहिया वाहन चालकों के लिए जोखिम बढ़ाते हैं। ऐसे में दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान, भारी वाहनों की गति पर नियंत्रण, सड़क किनारे पार्किंग की निगरानी और यातायात नियमों का सख्ती से पालन जरूरी है। लेकिन लगातार सामने आ रहे हादसे इन व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर रहे हैं। सड़क सुरक्षा अभियानों के दौरान हेलमेट पहनने, तेज रफ्तार से बचने और यातायात नियमों का पालन करने की अपील की जाती है।
जागरूकता रैलियां और समझाइश के कार्यक्रम भी होते हैं। लेकिन कोरबा जैसे औद्योगिक जिले में केवल जागरूकता अभियान पर्याप्त नहीं हैं। यहां भारी वाहनों के संचालन और आम लोगों की सुरक्षित आवाजाही के बीच संतुलन बनाने के लिए लगातार निगरानी और प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है। बुधवार को तीन लोगों की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सड़क सुरक्षा अभियान सिर्फ आयोजन और अपील तक सीमित हैं या दुर्घटनाओं को रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था भी बनाई जा रही है। फिलहाल पुलिस दोनों हादसों की जांच कर रही है।


