रायपुर, 30 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 की धान खरीदी से पहले राज्य सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देने का फैसला किया है। प्रदेश में 360 नए धान उपार्जन केंद्रों को मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही धान खरीदी केंद्रों की संख्या 2,740 से बढ़कर 3,100 हो जाएगी। सरकार का दावा है कि इस फैसले से दो लाख से अधिक किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और उन्हें धान बेचने के लिए दूर के केंद्रों तक नहीं जाना पड़ेगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि किसानों को धान विक्रय के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो, यह सरकार की प्राथमिकता है। नए केंद्रों के शुरू होने से खरीदी व्यवस्था का विस्तार होगा और पुराने केंद्रों पर किसानों की भीड़ तथा लंबी कतारों का दबाव कम करने में मदद मिलेगी।
राज्य में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए धान खरीदी 15 नवंबर 2026 से शुरू होकर 15 जनवरी 2027 तक चलेगी। खरीदी शुरू होने से पहले समितियों में तैयारियों को परखने के लिए 2 से 5 नवंबर तक ट्रायल रन आयोजित किया जाएगा। इस दौरान टोकन प्रक्रिया और तकनीकी व्यवस्थाओं की जांच की जाएगी, ताकि खरीदी के दौरान किसी तरह की बाधा न आए। इस बार किसानों को टोकन के लिए समितियों के चक्कर लगाने और लंबी कतारों में खड़े होने से राहत देने के लिए ‘तुंहर टोकन’ मोबाइल एप की सुविधा भी मिलेगी। किसान 10 नवंबर से घर बैठे 24 घंटे ऑनलाइन टोकन प्राप्त कर सकेंगे। इससे वे अपनी सुविधा के अनुसार धान विक्रय की तैयारी कर पाएंगे।
कम दूरी और कम परिवहन खर्च का दावा
सरकार के मुताबिक, नए उपार्जन केंद्रों से किसानों को अपने गांव या आसपास धान बेचने की सुविधा मिलेगी। इससे दूरस्थ केंद्रों तक उपज ले जाने में लगने वाला समय और परिवहन खर्च कम होगा। साथ ही अधिक केंद्रों पर एक साथ खरीदी होने से तौल और गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया को भी व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी। विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है। सरकार का कहना है कि नए केंद्रों से दो लाख से अधिक पंजीकृत किसानों को सीधे तौर पर सुविधा मिलेगी।
खरीदी व्यवस्था को सुगम बनाने पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि किसानों की मेहनत का सम्मान और उनकी सुविधाओं का विस्तार सरकार की प्राथमिकता है। धान खरीदी की पूरी प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक बनाने के लिए जरूरी व्यवस्थाएं की जा रही हैं। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि नए स्वीकृत केंद्र समय पर शुरू हों और खरीदी के दौरान टोकन, तौल, परिवहन तथा भुगतान की व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो, ताकि किसानों को वास्तव में राहत मिल सके।


