राजनांदगांव 4 अगस्त 2026। डोंगरगढ़ भाजपा में जारी संगठनात्मक असंतोष थमता नजर नहीं आ रहा है। 111 कार्यकर्ताओं के सामूहिक इस्तीफे, 26 पदाधिकारियों के पद छोड़ने और उसके बाद लगातार सामने आ रहे इस्तीफों के बीच अब भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ की नई जिला कार्यकारिणी घोषित होने के अगले ही दिन डोंगरगढ़ मंडल के सह संयोजक पंकज अग्रवाल ने भी अपने सभी दायित्वों से इस्तीफा दे दिया है। इससे संगठन के भीतर सब कुछ सामान्य होने के दावों पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। पंकज अग्रवाल ने भाजपा जिलाध्यक्ष को भेजे अपने इस्तीफे में निजी और व्यावसायिक कारणों का हवाला देते हुए कहा है कि वह संगठन को अपेक्षित समय नहीं दे पा रहे हैं। उन्होंने पार्टी नेतृत्व का आभार जताते हुए सभी पदों से तत्काल प्रभाव से मुक्त किए जाने का अनुरोध किया है।
डोंगरगढ़ मंडल के सह संयोजक पंकज अग्रवाल ने इस्तीफे में किसी भी नेता या पदाधिकारी पर कोई आरोप नहीं लगाया है। हालांकि राजनीतिक दृष्टि से यह इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब डोंगरगढ़ भाजपा पहले से ही लगातार उठ रहे असंतोष के कारण सुर्खियों में है। पिछले कुछ सप्ताह में 111 कार्यकर्ताओं का सामूहिक इस्तीफा, 26 नेताओं द्वारा पद छोड़ना और पूर्व भाजयुमो अध्यक्ष सुमित मिश्रा के इस्तीफे तथा बाद में उसे वापस लेने जैसे घटनाक्रम संगठन के भीतर चल रही खींचतान को सार्वजनिक कर चुके हैं। नई जिला कार्यकारिणी की घोषणा के बाद यह उम्मीद की जा रही थी कि असंतुष्ट नेताओं और कार्यकर्ताओं को साधने की कोशिश रंग लाएगी और संगठन में स्थिरता लौटेगी।
लेकिन अगले ही दिन एक और पदाधिकारी के इस्तीफे ने यह संकेत दिया है कि असंतोष पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही पंकज अग्रवाल ने अपने इस्तीफे को पूरी तरह निजी कारणों से जोड़ा हो, लेकिन लगातार सामने आ रहे इस्तीफे संगठनात्मक प्रबंधन पर सवाल खड़े कर रहे हैं। किसी भी राजनीतिक दल में लगातार हो रहे इस्तीफे कार्यकर्ताओं के मनोबल और संगठन की एकजुटता पर असर डालते हैं। अब सबसे बड़ी चुनौती पार्टी नेतृत्व के सामने संगठन के भीतर संवाद बढ़ाने और असंतुष्ट कार्यकर्ताओं का भरोसा वापस जीतने की है। यदि यह सिलसिला जल्द नहीं थमता, तो आने वाले राजनीतिक और संगठनात्मक कार्यक्रमों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल, डोंगरगढ़ भाजपा के भीतर चल रही हलचल राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।

