रायपुर 6 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ सरकार के बिजली क्षेत्र से जुड़े कैबिनेट फैसले पर सियासी घमासान शुरू हो गया है। प्रदेश कांग्रेस ने साय सरकार पर राज्य की बिजली कंपनियों के निजीकरण की दिशा में कदम बढ़ाने का आरोप लगाया है। कांग्रेस का दावा है कि स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध करने और बॉन्ड जारी करने के फैसले के जरिए सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली कंपनी में निजी निवेश का रास्ता खोल रही है। हालांकि, सरकार की ओर से इन आरोपों पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने बुधवार को कहा कि मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (CSPGCL) को 200 करोड़ रुपये तक के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) और बॉन्ड जारी कर स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध करने की मंजूरी दी है। बैज ने आरोप लगाया कि यह फैसला केवल पूंजी जुटाने का माध्यम नहीं, बल्कि सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली कंपनियों के निजीकरण की दिशा में उठाया गया कदम है।
बैज ने कहा कि छत्तीसगढ़ बिजली उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर राज्य है और यहां उत्पादन से लेकर ट्रांसमिशन तक की मजबूत व्यवस्था मौजूद है। ऐसे में सार्वजनिक कंपनी को बाजार से जोड़ने का फैसला कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार धीरे-धीरे बिजली क्षेत्र में निजी कंपनियों की हिस्सेदारी बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है और भविष्य में इसका लाभ बड़े उद्योग समूहों को मिल सकता है।
महंगी बिजली और स्मार्ट मीटर का भी उठाया मुद्दा
कांग्रेस ने इस मुद्दे को प्रदेश में बिजली दरों और स्मार्ट मीटर से जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा। दीपक बैज ने कहा कि पहले बिजली बिल हाफ योजना बंद की गई, फिर स्मार्ट मीटर के जरिए उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला गया और अब सार्वजनिक बिजली कंपनी को बाजार में उतारने की तैयारी की जा रही है। उनके मुताबिक, सरकार की आर्थिक नीतियों का खामियाजा आम उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है।
‘सार्वजनिक संपत्तियों को बेचने की कोशिश’
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार सार्वजनिक उपक्रमों को निजी क्षेत्र के हवाले करने की नीति पर आगे बढ़ रही है। बैज ने कहा कि केंद्र सरकार के बाद अब राज्य सरकार भी सार्वजनिक संस्थानों में निजी भागीदारी बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि बिजली जैसी बुनियादी सेवा से जुड़ी कंपनी में इस तरह के फैसले भविष्य में उपभोक्ताओं के हितों को प्रभावित कर सकते हैं।
कैबिनेट के फैसले पर बढ़ेगी राजनीतिक गर्मी
बिजली कंपनियों को लेकर कैबिनेट के फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस इसे सार्वजनिक संपत्तियों के निजीकरण की शुरुआत बता रही है, जबकि सरकार का कहना है कि यह निर्णय वित्तीय संसाधन जुटाने और बिजली क्षेत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा सत्ता और विपक्ष के बीच बड़े राजनीतिक टकराव का कारण बन सकता है।

