रायपुर 29 सितंबर 2026।छत्तीसगढ़ के नंदराज पर्वत पर खनन का मुद्दा अब पर्यावरण और आदिवासी अधिकारों के साथ सियासी बहस का विषय बनता जा रहा है। खनन के विरोध में पर्यावरण कार्यकर्ताओं और स्थानीय आदिवासियों की आवाज के बीच अब पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने भी मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने नंदराज पर्वत पर खनन को लेकर प्रदेश की साय सरकार और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर सवाल उठाए हैं। भूपेश बघेल ने इस मुद्दे पर तंज कसते हुए एक्स पर लिखा कि…..‘हमारी सरकार ने बहुत विचार विमर्श के बाद खनन की मंज़ूरी पर रोक लगा दी थी। इस बात से बिना डरे कि यह अडानी को दी गई खदान है। लेकिन नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा सारा देश अडानी को सौंप रही है, बेच रही है। अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि…..नंदराज पर्वत पर खनन रोकने की लड़ाई में कांग्रेस आदिवासियों के साथ खड़ी है।
आदिवासी नंदराज पर्वत को अपने देवी-देवताओं का स्थान मानते हैं. इसलिए वे इस पहाड़ में खनन का विरोध कर रहे हैं.
उनका विरोध खनन के नाम पर पेड़ों की कटाई के लिए भी है.
हमारी सरकार ने बहुत विचार विमर्श के बाद खनन की मंज़ूरी पर रोक लगा दी थी. इस बात से बिना डरे कि यह अडानी को दी गई खदान है.
एक बड़ा सवाल यह भी था कि जब 60 के दशक से एनएमडीसी लौह अयस्क खनन कर रहा है और उसका इतना लंबा अनुभव है तो फिर खनन के लिए अडानी की कंपनी को ठेका क्यों दिया जाना चाहिए? अगर करना ही है तो एनएमडीसी ख़ुद करे.
लेकिन नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा सारा देश अडानी को सौंप रही है. बेच रही है.
नंदराज पर्वत पर खनन को रोकने के लिए हम आदिवासियों के साथ खड़े हैं.
@narendramodi @PMOIndia @vishnudsai @ChhattisgarhCMO
— Bhupesh Baghel (@bhupeshbaghel) September 29, 2026
गौरतलब है कि नंदराज पर्वत यानी बैलाडीला के डिपॉजिट-13 पर खनन को लेकर एक बार फिर सूबे की राजनीति गरमा गयी है। कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकार में जिस नंदराज पर्वत पर खनन को लेकर हुए विराधे के बाद उस रोक लगा दी गयी थी। अब उसी क्षेत्र में खनन की अनुमति को लेकर स्थानीय आदिवासियों के साथ ही पर्यावरण कार्यकर्ता चिंता जता रहे है। इस मुद्दे पर अब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार पर सवाल उठाते हुए घेरा है। भूपेश बघेल ने अपने बयान में कहा कि उनकी सरकार ने विचार-विमर्श के बाद नंदराज पर्वत पर खनन की मंजूरी पर रोक लगाने का फैसला लिया था। उन्होंने कहा कि यह फैसला इस बात की परवाह किए बिना लिया गया था कि खदान का ठेका अडानी को दिया गया है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि जब राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (NMDC) 1960 के दशक से लौह अयस्क का खनन कर रहा है और उसे लंबा अनुभव है, तो खनन के लिए निजी कंपनी को ठेका देने की जरूरत क्यों है ? उनके मुताबिक, यदि खनन करना ही है, तो NMDC खुद यह काम कर सकता है। बघेल ने इस मुद्दे को केंद्र सरकार की नीतियों से जोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार देश के संसाधन अडानी को सौंप रही है।
आदिवासियों की आस्था बनाम खनन परियोजना
नंदराज पर्वत बस्तर के बैलाडीला क्षेत्र में स्थित है। यहां लौह अयस्क खनन को लेकर पहले भी आदिवासी समुदायों ने विरोध किया है। वर्ष 2019 में बैलाडीला के डिपॉजिट-13 में खनन और अडानी समूह को खनन कार्य सौंपे जाने के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। उस समय तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार ने खनन गतिविधियों पर रोक लगाकर ग्रामसभा की मंजूरी और पेड़ों की कटाई से जुड़े आरोपों की जांच के निर्देश दिए थे। विरोध करने वाले आदिवासी समुदायों का कहना रहा है कि नंदराज पर्वत उनके लिए केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था का केंद्र भी है। खनन को लेकर उनकी चिंताओं में जंगलों और पर्यावरण पर पड़ने वाला प्रभाव भी शामिल है।
पर्यावरण से शुरू हुआ मुद्दा, अब सियासी बहस तेज
नंदराज पर्वत पर खनन का विरोध अब केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं दिख रहा। स्थानीय आदिवासियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं की चिंताओं के बीच विपक्ष भी इस मुद्दे को उठा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बयान से खनन नीति, प्राकृतिक संसाधनों के इस्तेमाल और निजी कंपनियों को दिए जाने वाले ठेकों को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने के संकेत हैं। कांग्रेस की ओर से इस मुद्दे पर आदिवासी समुदायों के साथ खड़े होने की बात कही गई है। वहीं, इस मामले में मौजूदा साय सरकार और केंद्र सरकार का ताजा पक्ष सामने आने पर विवाद के विभिन्न पहलुओं को और स्पष्टता से समझा जा सकेगा।नंदराज पर्वत पर खनन को लेकर अब सवाल यह है कि आदिवासी आस्था, पर्यावरण संरक्षण और लौह अयस्क के दोहन के बीच संतुलन कैसे बनाया जाएगा। साथ ही, खनन का काम सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी से कराने की भूपेश बघेल की मांग पर भी राजनीतिक बहस आगे बढ़ सकती है।


