रायपुर 5 अक्टूबर 2026। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां के एक सार्वजनिक कार्यक्रम में दिए गए बयान के बाद देश की राजनीति में मताधिकार और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर बहस तेज हो गई है। इस मुद्दे पर छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने भी अपनी प्रतिक्रिया देते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और संवैधानिक जिम्मेदारी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि….“जब सुप्रीम कोर्ट के किसी न्यायाधीश को सार्वजनिक मंच से नागरिकों के समान मताधिकार की याद दिलानी पड़े, तो यह चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और उसकी जिम्मेदारी को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।” सिंहदेव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि….“जब सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश को खुले मंच से याद दिलाना पड़े कि इस देश में नागरिकों के दो दर्जे नहीं हो सकते, एक वोट वाले और एक बिना वोट के, तो समझ लीजिए कि चुनाव आयोग अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी से कितनी दूर जा चुका है।”
गौरतलब है कि देशभर में चुनाव आयोग की भूमिका और विश्वसनीयता को लेकर सवाल किये जा रहे है। विपक्षी दल लगातार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर केंद्र सरकार को घेरने में जुटे हुए है। इन सारे विरोधों के बीच सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुइयां के बयान ने देश की राजनीति में मताधिकार और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर बहस तेज कर दी है। भुइयां के बयान के बाद छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम टी.एस.सिंदेव ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाया है। सिंहदेव ने अपनी पोस्ट में कांग्रेस के लगातार उठाए जा रहे मतदाता अधिकारों के मुद्दे का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से इस बात को लेकर सवाल उठाती रही है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी तथा निष्पक्ष होनी चाहिए। सिंहदेव ने लिखा कि…“जब भी वोट चोरी और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाए गए, तब जवाब देने के बजाय सवाल पूछने वालों को ही कटघरे में खड़ा किया गया।” उन्होंने स्पष्ट किया कि वोट देना किसी चुनाव आयोग की मेहरबानी नहीं, बल्कि नागरिक का सबसे बड़ा संवैधानिक अधिकार है।
SIR प्रक्रिया के बीच बयान ने बढ़ाई राजनीतिक बहस
दरअसल, जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने 4 अक्टूबर को हैदराबाद स्थित NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ में आयोजित 19वीं जस्टिस बीआर साहनी मेमोरियल मूट कोर्ट प्रतियोगिता के समापन समारोह में अपने संबोधन के दौरान मताधिकार के संवैधानिक महत्व पर विस्तार से बात की थी। उन्होंने कहा था कि….भारतीय संविधान नागरिकों के दो वर्गों की कल्पना नहीं करता। एक वर्ग ऐसा हो जिसे मतदान का अधिकार प्राप्त हो और दूसरा ऐसा जिसे इस अधिकार से वंचित कर दिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि….यदि किसी प्रक्रिया के कारण लाखों नागरिकों को मताधिकार से वंचित होना पड़ता है, तो ऐसी प्रक्रिया मनमानी होगी और संविधान के अनुच्छेद 14 तथा 326 के विपरीत होगी।
जस्टिस भुइयां ने मतदाता सूची से नाम हटाने के संबंध में कहा कि किसी मृत मतदाता को छोड़कर, एक बार मतदाता सूची में दर्ज नाम को नोटिस और सुनवाई का अवसर दिए बिना नहीं हटाया जा सकता। हालांकि जस्टिस भुइयां ने अपने संबोधन में चुनाव आयोग या SIR प्रक्रिया पर किसी विशिष्ट न्यायिक आदेश के रूप में टिप्पणी नहीं की थी। उनके बयान को मौजूदा मतदाता सूची पुनरीक्षण विवाद के संदर्भ में राजनीतिक दलों द्वारा उठाया जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया और चुनाव आयोग की जवाबदेही को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। सिंहदेव की प्रतिक्रिया ने इस विवाद को छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी चर्चा का विषय बना दिया है।
जब सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश को खुले मंच से याद दिलाना पड़े कि इस देश में नागरिकों के दो दर्जे नहीं हो सकते, एक वोट वाले और एक बिना वोट के, तो समझ लीजिए कि चुनाव आयोग अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी से कितनी दूर जा चुका है।
जस्टिस उज्ज्वल भुइयां जी ने कहा है कि लाखों नागरिकों को मताधिकार से बाहर करने वाली कोई भी प्रक्रिया असंवैधानिक है, उसे कोई whataboutery सही नहीं ठहरा सकती, और मृत मतदाता को छोड़कर किसी का नाम नोटिस और सुनवाई के बिना नहीं काटा जा सकता।
भारत का संविधान हर वयस्क नागरिक को एक वोट का अधिकार देता है, वो बराबरी का अधिकार है – बिना किसी आर्थिक या सामाजिक हैसियत के भेदभाव के, और बिना धर्म, जाति, पंथ, क्षेत्र या भाषा के भेदभाव के। यही बराबरी हमारे लोकतंत्र की नींव है।
कांग्रेस यही बात लगातार कहती आई है। वोट चोरी पर जब भी सवाल उठे, जवाब देने के बजाय सवाल पूछने वालों को ही कटघरे में खड़ा किया गया। वोट नागरिक का सबसे बड़ा संवैधानिक अधिकार है, किसी आयोग की मेहरबानी नहीं।
— T S Singhdeo (@TS_SinghDeo) October 5, 2026


