रायपुर 3 नवंबर 2026। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी की एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर बनाए गए कथित आपत्तिजनक वीडियो के मामले में भारतीय जनता पार्टी ने मोर्चा खोल दिया है। भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने रायपुर के सिविल लाइंस थाने पहुंचकर अमित जोगी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद पुलिस ने उनके खिलाफ FIR दर्ज कर अपराध पंजीबद्ध किया है। इस मामले ने राजनीतिक बयानबाजी को भी तेज कर दिया है। वहीं, अमित जोगी ने विवाद बढ़ने के बाद पोस्ट को सोशल मीडिया से हटा दिया और अपने तरीके को अनुचित मानते हुए माफी मांगी है।
गौरतलब है कि अमित जोगी ने कथित वोट चोरी के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निशाने पर लेते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। वीडियो में दोनों के मुखौटे पहने किरदारों के जरिए सांकेतिक शादी और हनीमून का दृश्य दिखाया गया था। इसे ‘ज्ञानू-जानू की शादी’ नाम दिया गया था। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगीं। भाजपा नेताओं और समर्थकों ने इसे राजनीतिक विरोध की मर्यादा के खिलाफ बताते हुए आपत्ति जताई। इसके बाद भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने रायपुर के सिविल लाइंस थाने पहुंचकर अमित जोगी के खिलाफ शिकायत की और कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई।
BJP ने बनाया राजनीतिक मुद्दा, थाने पहुंचकर जताया विरोध
भाजपा ने इस मामले को केवल सोशल मीडिया पोस्ट का विवाद नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री और संवैधानिक पद की गरिमा से जुड़ा मुद्दा बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि राजनीतिक विरोध और व्यंग्य के नाम पर ऐसी सामग्री स्वीकार नहीं की जा सकती। इसी रुख के साथ भाजपा नेताओं ने थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। दूसरी ओर, यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब कथित वोट चोरी का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का विषय बना हुआ है। अमित जोगी ने इसी राजनीतिक बहस के संदर्भ में वीडियो पोस्ट किया था, लेकिन उसकी प्रस्तुति ने मूल मुद्दे से ज्यादा विवाद को जन्म दे दिया। विवाद बढ़ने के बाद अमित जोगी ने वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट से हटा दिया।
उन्होंने स्वीकार किया कि अपनी बात रखने का तरीका सही नहीं था और जिस संदेश को वे देना चाहते थे, उसे किसी दूसरे तरीके से भी रखा जा सकता था। जोगी ने कहा कि खुद का मजाक उड़ाकर अपनी बात रखना अलग है, लेकिन किसी के निजी रिश्ते या निजी स्पेस को व्यंग्य का हिस्सा बनाना ऐसी सीमा है, जिसे वे पार नहीं करना चाहते। उन्होंने पोस्ट हटाने के साथ उन लोगों से माफी भी मांगी, जिनकी भावनाएं आहत हुई हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर राजनीतिक व्यंग्य की मर्यादा और सोशल मीडिया पर नेताओं की जवाबदेही को बहस के केंद्र में ला दिया है। एक तरफ भाजपा ने इसे आपत्तिजनक सामग्री बताकर पुलिस कार्रवाई का मुद्दा बनाया है, तो दूसरी तरफ अमित जोगी की माफी के बावजूद मामला अब कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर पहुंच गया है। अब निगाहें पुलिस की आगे की जांच और इस मामले में होने वाली कानूनी कार्रवाई पर रहेंगी।


