रायपुर/भिलाई 23 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में भिलाई स्टील प्लांट की बिक्री और निजीकरण को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने संयंत्र प्रबंधन के खंडन पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि अडानी समूह की नजर भिलाई स्टील प्लांट की एकमात्र रेल मिल पर है। उन्होंने पूछा कि जब बिक्री से जुड़ी खबरों को भ्रामक बताया जा रहा है, तो संयंत्र के जनसंपर्क विभाग को खंडन जारी करने का अधिकार किसने दिया ? क्या इसके लिए भारत सरकार से अनुमति ली गई थी ? बघेल के आरोपों के बीच भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव ने भी संयंत्र प्रबंधन को घेरा है। उन्होंने सवाल किया कि अगर बिक्री की कोई योजना नहीं है, तो करीब 10 हजार रहवासियों को घर खाली करने के नोटिस क्यों दिए गए ?
गौरतलब है कि गौतम अडानी के भिलाई स्टील प्लांट दौरे की खबर के बाद से ही सूबे की राजनीति गरमायी हुई है। पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने अडानी के इस दौरे को बीएसपी के निजीकरण से जोड़कर केंद्र और सूबे की साय सरकार पर हमला बोला था। बघेल के बयान के बाद बकायदा बीएसपी प्रबंधन ने इसका खंडन जारी किया था। जिसके बाद एक बार फिर भूपेश बघेल ने भिलाई स्टील प्लांट को लेकर बयान देकर सूबे की राजनीति गरमा दी है। भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि अडानी समूह भिलाई स्टील प्लांट की एकमात्र रेल मिल को हासिल करना चाहता है। उन्होंने संयंत्र में अडानी समूह के दौरे को लेकर भी सवाल उठाए और पूछा कि आखिर इस दौरे का उद्देश्य क्या था। भाजपा की ओर से सोशल मीडिया पर जारी पोस्टर का जिक्र करते हुए बघेल ने कहा कि उन्होंने भिलाई स्टील प्लांट की बात की थी, लेकिन पोस्टर में ट्रेन और रेल पटरी दिखाई गई।
उन्होंने इसे रेल मिल को लेकर अपनी आशंका से जोड़ते हुए कहा कि यह पोस्टर भी कई सवाल खड़े करता है। बघेल के इन बयानों ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के निजीकरण को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को फिर हवा दे दी है। आपको बता दे बघेल के पूर्व बयान के बाद भिलाई स्टील प्लांट के जनसंपर्क विभाग ने बिक्री से जुड़ी खबरों को भ्रामक बताया था। इस पर बघेल ने सवाल किया कि क्या जनसंपर्क विभाग को इस तरह का खंडन जारी करने का अधिकार है ? उन्होंने कहा कि जनसंपर्क विभाग न तो स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड का प्रवक्ता है और न ही इस्पात मंत्रालय का। बघेल ने पूछा कि क्या यह बयान भारत सरकार की अनुमति से जारी किया गया है ? उन्होंने कहा कि संयंत्र की बिक्री का फैसला भारत सरकार के स्तर पर ही हो सकता है और यदि बिना अनुमति बयान जारी किया गया है, तो संबंधित अधिकारी को भिलाई की जनता से माफी मांगनी चाहिए।
10 हजार लोगों को घर खाली करने का नोटिस
इस विवाद में भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव ने भी संयंत्र प्रबंधन पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि यदि भिलाई स्टील प्लांट को बेचने की कोई योजना नहीं है, तो करीब 10 हजार रहवासियों को घर खाली करने के नोटिस क्यों दिए गए ? यादव ने आरोप लगाया कि यदि प्रबंधन संयंत्र क्षेत्र की बसाहट खत्म करने की दिशा में कदम उठा रहा है, तो इसके पीछे संयंत्र को बेचने का उद्देश्य हो सकता है। हालांकि, नोटिस जारी करने के कारण और बिक्री से उसके संबंध की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
निजीकरण के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश
भूपेश बघेल ने भिलाई स्टील प्लांट के मुद्दे को सार्वजनिक क्षेत्र की संपत्तियों के निजीकरण से जोड़ते हुए बालको, नगरनार स्टील प्लांट और अन्य सार्वजनिक उपक्रमों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भिलाई में पावर प्लांट, ऑक्सीजन प्लांट और सिंटर प्लांट की बिक्री जैसे कदम पहले भी उठाए गए हैं। बघेल ने कोयला खनन, बिजली उत्पादन और लौह अयस्क से जुड़े कारोबार में निजी कंपनियों की बढ़ती भूमिका का हवाला देते हुए आशंका जताई कि अब भिलाई स्टील प्लांट को लेकर भी इसी तरह की कोशिश हो सकती है।
भिलाई स्टील प्लांट की बिक्री को लेकर प्रबंधन के खंडन और कांग्रेस नेताओं के आरोपों ने राजनीतिक विवाद को तेज कर दिया है। एक तरफ प्रबंधन ने बिक्री से जुड़ी खबरों को भ्रामक बताया है, तो दूसरी तरफ बघेल और देवेंद्र यादव ने रेल मिल, रहवासियों को दिए गए नोटिस और खंडन जारी करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। फिलहाल, BSP की बिक्री या अडानी समूह द्वारा इसे खरीदने की आधिकारिक योजना की पुष्टि नहीं हुई है। अब इस पूरे विवाद में केंद्र सरकार, इस्पात मंत्रालय और संयंत्र प्रबंधन की ओर से आने वाला स्पष्ट जवाब महत्वपूर्ण होगा।


