भिलाई 21 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ के भिलाई नगर निगम में पेवर ब्लॉक लगाने के कार्यों में कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब हाईकोर्ट पहुंच गया है। जांच में 29 अनुबंधों में से 21 में निर्माण कार्यों की मात्रा को लेकर गड़बड़ी सामने आने के बाद संबंधित इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई और वसूली की प्रक्रिया शुरू की गई थी। लेकिन इंजीनियरों की याचिका पर हाईकोर्ट ने फिलहाल कार्रवाई पर रोक लगा दी है। अदालत ने राज्य शासन और दुर्ग कलेक्टर समेत संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 9 दिसंबर 2026 को होगी।
जानकारी के मुताबिक भिलाई नगर निगम के पेवर ब्लॉक लगाने के कार्यों की जांच में सामने आया कि वर्ष 2023-24 के दौरान किए गए 29 अनुबंधों में से 21 में माप पुस्तिका में दर्ज निर्माण कार्यों की मात्रा और मौके पर मिली वास्तविक मात्रा के बीच अंतर था। जांच प्रतिवेदन में 16 लाख 85 हजार 457 रुपये के कथित अधिक भुगतान का उल्लेख किया गया। इसी आधार पर संबंधित इंजीनियरों और कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई और राशि की वसूली की प्रक्रिया शुरू हुई। शिकायतों के बाद दुर्ग कलेक्टर ने लोक निर्माण विभाग और ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के कार्यपालन अभियंताओं से संयुक्त जांच कराई थी। जांच रिपोर्ट 27 अगस्त 2026 को तैयार हुई।
इसके बाद 3 सितंबर को कलेक्टर ने नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखकर संबंधित इंजीनियरों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा कथित अधिक भुगतान की राशि वसूलने के निर्देश दिए। इन निर्देशों के बाद नगर निगम के मुख्य अभियंता ने 16 सितंबर 2026 को संबंधित इंजीनियरों को कारण बताओ नोटिस जारी किए। उप अभियंता अर्पित बंजारे सहित अन्य इंजीनियरों ने इन नोटिसों को हाईकोर्ट में चुनौती दी। याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में दलील दी गई कि जांच के दौरान उन्हें अपना पक्ष रखने या जांच प्रक्रिया में शामिल होने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया। उनका कहना था कि उनकी बात सुने बिना ही जांच रिपोर्ट में उनके नाम शामिल कर दिए गए और कार्रवाई व वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
इंजीनियरों ने यह भी तर्क दिया कि कलेक्टर के पत्र में पहले ही कार्रवाई और वसूली के निर्देश दिए जा चुके थे। ऐसे में बाद में जारी कारण बताओ नोटिस के जरिए पक्ष रखने का अवसर देना महज औपचारिकता बनकर रह गया। याचिकाकर्ताओं ने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत बताया। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी तथा अधिवक्ता जैनब मुस्तफा वनक और अपूर्वा निगम ने पक्ष रखा। राज्य शासन की ओर से अदालत में दलील दी गई कि कलेक्टर ने शिकायतों के आधार पर कराई गई जांच के निष्कर्षों के अनुसार निर्देश जारी किए थे। शासन ने कलेक्टर के पत्र और कारण बताओ नोटिस को नियमानुसार बताया। प्रतिवादियों ने जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु की एकलपीठ में हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने दुर्ग कलेक्टर के 3 सितंबर 2026 के पत्र और नगर निगम के मुख्य अभियंता के 16 सितंबर 2026 के कारण बताओ नोटिस के प्रभाव और क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी। हाईकोर्ट ने राज्य शासन, दुर्ग कलेक्टर और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 9 दिसंबर 2026 को होगी। यह अंतरिम राहत है, अंतिम फैसला नहीं। अदालत की रोक को जांच में सामने आई कथित अनियमितताओं पर क्लीन चिट नहीं माना जा सकता। मामले में आगे की सुनवाई के दौरान संबंधित पक्षों के जवाब और कानूनी दलीलों के आधार पर स्थिति स्पष्ट होगी।
42 करोड़ के काम और 30 करोड़ के हिसाब पर भी उठे थे सवाल
भिलाई नगर निगम की परियोजना शाखा के पेवर ब्लॉक निर्माण कार्य पहले भी सवालों के घेरे में रहे हैं। पूर्व में सामने आई जानकारी के मुताबिक, करीब 42 करोड़ रुपये के कामों और उनके हिसाब-किताब को लेकर सवाल उठे थे। लगभग 30 करोड़ रुपये के कार्यों का पूरा हिसाब नहीं मिलने और कई फाइलों की जांच नहीं हो पाने की बात भी सामने आई थी। हालांकि, इन व्यापक वित्तीय सवालों और मौजूदा मामले में दर्ज 16.85 लाख रुपये के कथित अधिक भुगतान के बीच संबंध को लेकर उपलब्ध जानकारी में पूरी स्पष्टता नहीं है। अब सबकी नजर 9 दिसंबर को होने वाली सुनवाई पर है। अदालत में शासन और संबंधित अधिकारियों के जवाब के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि कार्रवाई को लेकर उठाए गए सवालों पर आगे क्या रुख सामने आता है।


