कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में स्थित एसईसीएल की कुसमुंडा मेगा ओपनकास्ट खदान में भारी वाहनों से जुड़े हादसों का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। ताजा घटना में 100 टन क्षमता का एक डंपर अनियंत्रित होकर पलट गया, जिससे उसका ऑपरेटर लक्ष्मी प्रसाद गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे साथी कर्मचारियों ने बाहर निकालकर एनकेएच अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसका इलाज जारी है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, फिलहाल उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। हादसा फर्स्ट शिफ्ट के दौरान V-5 अपर कुसमुंडा पैच में हुआ। डंपर के अचानक अनियंत्रित होकर पलटने से खदान में हड़कंप मच गया। हालांकि, दुर्घटना की वास्तविक वजह जांच के बाद ही स्पष्ट होगी, लेकिन लगातार सामने आ रही घटनाओं ने एसईसीएल प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कुसमुंडा सहित कोरबा के एसईसीएल खदान क्षेत्रों में भारी वाहनों से जुड़ी घटनाएं लगातार चिंता बढ़ा रही हैं। दो दिन पहले ही एसईसीएल दीपका परियोजना में ठेका कंपनी के एक टीपर में आग लगने की घटना सामने आई थी। उस घटना में चालक ने वाहन से कूदकर अपनी जान बचाई थी। अब 100 टन क्षमता वाले डंपर के पलटने से एक बार फिर खदानों में काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। कुछ समय पहले भी कुसमुंडा खदान में डंपर में आग लगने की घटना सामने आई थी। इसके अलावा डंपर पलटने, खदान क्षेत्र में स्लाइडिंग और तकनीकी खराबी से जुड़ी घटनाओं की जानकारी भी सामने आती रही है। ऐसे में सवाल है कि क्या हर हादसे के बाद जांच और आश्वासन तक ही कार्रवाई सीमित रह जाती है? क्या भारी वाहनों के संचालन, सड़क की स्थिति, वाहन के रखरखाव और कार्यस्थल की सुरक्षा व्यवस्था की नियमित समीक्षा प्रभावी तरीके से हो रही है? इन सवालों का जवाब एसईसीएल प्रबंधन को देना चाहिए।
DGMS के सुरक्षा नियमों का कितना पालन
कोयला खदानों में भारी वाहनों का सुरक्षित संचालन केवल कंपनी की आंतरिक व्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह खदान सुरक्षा से जुड़े वैधानिक प्रावधानों के पालन से भी जुड़ा है। खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) का दायित्व खदानों में सुरक्षा मानकों के अनुपालन की निगरानी करना है। खदान में डंपर जैसे भारी वाहनों के सुरक्षित संचालन के लिए सड़क की स्थिति, ढलान, मोड़, दृश्यता, वाहन की तकनीकी स्थिति, ब्रेकिंग सिस्टम और परिचालन संबंधी सुरक्षा उपाय महत्वपूर्ण होते हैं। खदान की परिस्थितियों के अनुरूप निर्धारित मानकों और स्वीकृत सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन किया जाना जरूरी है।
मौजूदा हादसे के बाद यह जांच महत्वपूर्ण होगी कि V-5 अपर कुसमुंडा पैच में डंपर के संचालन के लिए सड़क और कार्यस्थल की स्थिति कैसी थी। क्या वाहन का तकनीकी निरीक्षण और रखरखाव निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया गया था? क्या ऑपरेटर को सुरक्षित संचालन के लिए आवश्यक परिस्थितियां उपलब्ध थीं? और क्या घटना से पहले किसी तकनीकी या परिचालन संबंधी समस्या की जानकारी थी ? इन बिंदुओं पर जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही यह तय किया जा सकेगा कि हादसे में किसी सुरक्षा मानक की अनदेखी हुई थी या नहीं।
उत्पादन का दबाव या सुरक्षा में चूक
खदानों में उत्पादन और परिवहन की गति के साथ कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है। कर्मचारियों की ओर से उत्पादन के दबाव में सुरक्षा उपायों की अनदेखी किए जाने के आरोप लगाए जाते रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि स्वतंत्र जांच और संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर होनी चाहिए। लेकिन लगातार सामने आने वाली दुर्घटनाएं प्रबंधन के लिए सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने का स्पष्ट कारण हैं। यदि सड़क की खराब स्थिति, वाहन के रखरखाव में कमी, परिचालन संबंधी त्रुटि या निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया का उल्लंघन हादसे की वजह बनता है, तो जिम्मेदारी तय कर सुधारात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए। केवल दुर्घटना के बाद जांच शुरू करना पर्याप्त नहीं होगा। जरूरी है कि संभावित खतरों की पहचान पहले की जाए और ऐसी व्यवस्था विकसित हो, जिससे ऑपरेटरों को असुरक्षित परिस्थितियों में काम न करना पड़े।
डंपर पलटने की घटना के बाद एसईसीएल प्रबंधन की ओर से जांच शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच में दुर्घटना की परिस्थितियों, वाहन की तकनीकी स्थिति और कार्यस्थल पर मौजूद सुरक्षा इंतजामों की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी। इसके साथ ही यह भी देखना होगा कि पूर्व में हुई वाहन दुर्घटनाओं और आग लगने की घटनाओं के बाद क्या सुधारात्मक कदम उठाए गए थे। यदि पहले की जांच में कमियां सामने आई थीं, तो उनके अनुपालन की स्थिति भी स्पष्ट होनी चाहिए। सबसे बड़ा सवाल यही है कि कोयला उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली कुसमुंडा खदान में कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एसईसीएल प्रबंधन और संबंधित सुरक्षा एजेंसियां क्या ठोस कदम उठा रही हैं? हादसे की निष्पक्ष जांच, सुरक्षा मानकों के अनुपालन की समीक्षा और जिम्मेदारी तय करने से ही इन सवालों का जवाब मिल सकेगा।


