बिलासपुर 6 अक्टूबर 2026। बिलासपुर की अरपा नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए अब शहर के 70 छोटे-बड़े नालों के गंदे पानी के उपचार की समग्र कार्ययोजना तैयार की जाएगी। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने बिलासपुर नगर निगम के कार्यों की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को प्रत्येक नाले की स्थिति और उससे निकलने वाले पानी का आकलन कर विस्तृत डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए हैं। यह निर्देश ऐसे समय आया है जब अरपा नदी में सीवरेज और नालों के पानी के पहुंचने को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भी शासन और नगर निगम से जवाब मांग चुका है। कोर्ट ने यह स्पष्ट करने को कहा है कि शहर के करीब 70 नालों का सीवरेज वास्तव में एसटीपी तक पहुंच रहा है या नहीं और नदी में जाने से पहले उसका उपचार हो रहा है या नहीं।
बिलासपुर कलेक्टोरेट में आयोजित समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव बोरा ने अरपा नदी में नालों के जरिए पहुंच रहे दूषित पानी को रोकने के लिए चल रहे उपायों की जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि शहर में कुल 70 छोटे-बड़े नाले अरपा नदी में मिलते हैं बोरा ने कहा कि नालों का पानी सीधे नदी में जाने से रोकने के लिए सिर्फ तात्कालिक उपाय पर्याप्त नहीं होंगे। प्रत्येक नाले की स्थिति, पानी की मात्रा और उपचार की आवश्यकता का आकलन कर तकनीकी रूप से व्यवहारिक और लंबे समय तक प्रभावी रहने वाली योजना तैयार की जाए। उन्होंने डीपीआर में भविष्य की जरूरतों और पर्यावरण पर पड़ने वाले दीर्घकालीन प्रभावों को भी शामिल करने के निर्देश दिए।
गौरतलब है कि अरपा प्रदूषण मामले में हाईकोर्ट ने भी इसी सवाल पर प्रशासन से विस्तृत जानकारी मांगी है। शासन के अनुसार बिलासपुर में प्रतिदिन करीब 72.20 एमएलडी सीवरेज निकलता है। फिलहाल चार एसटीपी संचालित हैं, जिनकी कुल क्षमता 78 एमएलडी बताई गई है। इसके अलावा 16-16 एमएलडी क्षमता के दो और एसटीपी निर्माणाधीन हैं। इनके शुरू होने के बाद कुल क्षमता 94 एमएलडी होने की बात कही गई है। हालांकि कोर्ट का सवाल सिर्फ एसटीपी की क्षमता तक सीमित नहीं है। यह भी स्पष्ट करना है कि 70 नालों का सीवरेज वास्तव में एसटीपी तक पहुंच रहा है या नहीं और कितना पानी बिना उपचार के अरपा में जा रहा है। मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर 2026 को होनी है।
प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने जल स्रोतों के संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि आने वाला समय पानी का है। इसलिए सतही जल स्रोतों को स्वच्छ रखने और उनके संरक्षण के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करना जरूरी है। उन्होंने स्वच्छता व्यवस्था को लगातार बेहतर बनाए रखने और लोगों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के भी निर्देश दिए। बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी), मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना और नगरीय अधोसंरचना से जुड़े कार्यों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को सभी स्वीकृत कार्यों को गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए गए। बिलासपुर में नगरीय अधोसंरचना मद के तहत 542 कार्य स्वीकृत हैं। इनमें 334 पूरे, 182 प्रगतिरत और 26 कार्य अभी शुरू नहीं हुए हैं। प्रगतिरत कार्यों में तेजी लाने के साथ निर्माण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।
नालंदा परिसर की भी समीक्षा
निर्माणाधीन नालंदा परिसर की प्रगति की जानकारी भी ली गई। अधिकारियों के मुताबिक 500 लोगों की बैठक क्षमता वाले इस एजुकेशन हब को आधुनिक शैक्षणिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। प्रथम तल का स्लैब पूरा हो चुका है, जबकि दूसरे तल का स्लैब करीब 50 प्रतिशत पूरा हुआ है। प्रमुख सचिव ने निर्माण कार्य को तय समय में पूरा करने और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का निरीक्षण
बैठक के बाद सोनमणि बोरा ने कलेक्टर संजय अग्रवाल, एसएसपी रजनेश सिंह और निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे के साथ तारबाहर स्थित कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का निरीक्षण किया। उन्होंने आईटीएमएस की कार्यप्रणाली देखी और शहर की यातायात तथा सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए नई कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। अब अरपा के लिए असली चुनौती 70 नालों की पहचान से आगे बढ़कर उनके पानी को प्रभावी ढंग से रोकना, उपचारित करना और नदी को प्रदूषण से बचाना है।


