अंबिकापुर 15 जुलाई 2026। अंबिकापुर स्थित बाल संप्रेक्षण गृह की सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। मंगलवार रात 13 अपचारी बालक पुराने दरवाजे को तोड़कर परिसर से फरार हो गए। हैरानी की बात यह है कि पिछले एक महीने में यह दूसरी बड़ी घटना है। इससे पहले 23 जून को भी 13 अपचारी बालक खिड़की तोड़कर भाग निकले थे। लगातार हो रही घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के मुताबिक घटना गांधीनगर थाना क्षेत्र के कन्या परिसर रोड स्थित बिशुनपुर बाल संप्रेक्षण गृह की है। मंगलवार देर शाम 14 अपचारी बालकों ने मिलकर पुराने दरवाजे को तोड़ दिया और परिसर से बाहर निकल आए। इनमें से एक बालक को मौके पर ही पकड़ लिया गया, जबकि शेष 13 अहाता फांदकर फरार हो गए। घटना की सूचना मिलते ही गांधीनगर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। फरार अपचारी बालकों की तलाश के लिए पुलिस की अलग-अलग टीमें गठित की गई हैं।
रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और आसपास के क्षेत्रों में सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही बच्चों के परिजनों से भी अपील की गई है कि यदि वे उनके संपर्क में आएं तो उन्हें वापस बाल संप्रेक्षण गृह पहुंचाने में सहयोग करें। यह पहली बार नहीं है जब सुरक्षा व्यवस्था में ऐसी चूक सामने आई हो। 23 जून को भी बारिश का फायदा उठाकर 13 अपचारी बालक खिड़की तोड़कर फरार हो गए थे। उस घटना के बाद अब तक दो अपचारी बालकों का कोई सुराग नहीं मिल सका है।
इससे पहले फरवरी में भी बाल संप्रेक्षण गृह से अपचारी बच्चों के भागने की घटना हो चुकी है। पिछली घटना के बाद कलेक्टर अजीत वसंत और SSP राजेश अग्रवाल ने स्वयं बाल संप्रेक्षण गृह का निरीक्षण किया था। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और खामियों को दूर करने के निर्देश भी दिए गए थे। लेकिन एक महीने के भीतर दोबारा हुई घटना ने इन निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार हो रही फरारी की घटनाएं यह संकेत दे रही हैं कि बाल संप्रेक्षण गृह की सुरक्षा व्यवस्था में अब भी गंभीर खामियां मौजूद हैं।
यदि अपचारी बालक बार-बार दरवाजे और खिड़कियां तोड़कर आसानी से फरार हो रहे हैं, तो यह केवल सुरक्षा चूक नहीं, बल्कि निगरानी व्यवस्था की विफलता भी मानी जा रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यहीं कि पूर्व की घटनाओं से सबक क्यों नहीं लिया गया और सुरक्षा व्यवस्था को समय रहते प्रभावी क्यों नहीं बनाया गया ? फिलहाल पुलिस फरार अपचारी बालकों की तलाश में जुटी है। वहीं, इस घटना के बाद बाल संप्रेक्षण गृह की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही एक बार फिर जांच के दायरे में आ गई है।

