गरियाबंद 4 नवंबर 2026। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में शिक्षा विभाग की वित्तीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। फिंगेश्वर विकासखंड में एक ऐसी योजना के बैंक खातों से सात साल तक लाखों रुपये निकाले जाते रहे, जो वर्ष 2018 में ही बंद हो चुकी थी। आरोप है कि वर्ष 2018 से 2025 के बीच अलग-अलग किस्तों में करीब 63 लाख रुपये का आहरण किया गया, लेकिन इस राशि का हिसाब विभागीय कैशबुक और दूसरे सरकारी अभिलेखों में दर्ज नहीं मिला। मामले की शिकायत कलेक्टर जनदर्शन में किए जाने के बाद प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं। जिला शिक्षा अधिकारी ने भी मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय टीम गठित की है। अब जांच में यह पता लगाया जाएगा कि बंद योजना के खाते किसके निर्देश पर संचालित होते रहे और लाखों रुपये की निकासी किस प्रक्रिया के तहत की गई।
जानकारी के मुताबिक, सर्व शिक्षा अभियान के तहत वर्ष 2015-16 और 2016-17 में शिक्षाकर्मियों के एरियर्स भुगतान के लिए करीब तीन करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। एक जुलाई 2018 को शिक्षाकर्मियों के संविलियन के बाद इन खातों में लगभग एक करोड़ 35 लाख रुपये की राशि शेष रह गई थी। नियमानुसार, योजना का उद्देश्य पूरा होने और खातों की उपयोगिता समाप्त होने के बाद बची हुई राशि शासन को वापस लौटाई जानी थी। इसके साथ ही संबंधित बैंक खाते भी बंद किए जाने थे। लेकिन आरोप है कि ऐसा नहीं किया गया और खाते अगले कई वर्षों तक संचालित होते रहे। मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि वर्ष 2018 से 2025 के बीच इन खातों से अलग-अलग तारीखों पर कई किस्तों में करीब 63 लाख रुपये निकाले जाने की जानकारी सामने आई है।
शिकायत के मुताबिक, इन निकासी का उल्लेख विभागीय कैशबुक, कैश रजिस्टर और अन्य सरकारी दस्तावेजों में नहीं मिला। यदि जांच में यह तथ्य प्रमाणित होता है, तो यह केवल लेखा संबंधी लापरवाही का मामला नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी धन के उपयोग और वित्तीय जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े करेगा। इस पूरे मामले में कई अहम सवाल सामने हैं। जब योजना वर्ष 2018 में बंद हो चुकी थी, तो उसके बैंक खाते सात साल तक किस आधार पर संचालित होते रहे? शेष राशि शासन को वापस क्यों नहीं की गई? करीब 63 लाख रुपये की निकासी किसके निर्देश पर हुई? और सबसे महत्वपूर्ण, इन लेन-देन का विवरण विभागीय रिकॉर्ड में क्यों दर्ज नहीं मिला?शिकायतकर्ता ने इन सवालों को उठाते हुए कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने जांच के निर्देश दिए हैं।
पांच सदस्यीय टीम करेगी जांच, दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा
जिला शिक्षा अधिकारी के अनुसार, मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय टीम गठित की गई है। टीम बैंक खातों से हुए लेन-देन, निकासी की तारीखों, संबंधित दस्तावेजों और विभागीय रिकॉर्ड का मिलान कर रही है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा है कि जांच में यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। वर्ष 2018 से 2025 के बीच फिंगेश्वर विकासखंड में पदस्थ रहे अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच में महत्वपूर्ण हो सकती है। अब निगाहें पांच सदस्यीय जांच टीम की रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह रिपोर्ट ही स्पष्ट करेगी कि 63 लाख रुपये की कथित निकासी के पीछे क्या प्रक्रिया रही, सरकारी रिकॉर्ड में इसका हिसाब क्यों नहीं मिला और इस पूरे मामले में जिम्मेदारी किसकी बनती है। फिलहाल, बंद योजना के खाते से वर्षों तक हुए कथित आहरण ने शिक्षा विभाग की वित्तीय निगरानी और सरकारी धन के रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


