Govardhan Puja। दीपावली के बाद मनाया जाने वाला गोवर्धन पूजा का पर्व इस साल 10 नवंबर, मंगलवार को मनाया जाएगा। 9 और 10 नवंबर की तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस बना हुआ है। इसकी वजह कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि का 9 नवंबर को दोपहर से शुरू होकर 10 नवंबर को दोपहर तक रहना है। उदया तिथि के अनुसार छत्तीसगढ़ में गोवर्धन पूजा 10 नवंबर को होगी। हिंदू धर्म में गोवर्धन पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के साथ गोवर्धन पर्वत और गायों की पूजा की जाती है। इसे अन्नकूट पर्व भी कहा जाता है। मंदिरों और घरों में विभिन्न प्रकार के पकवान तैयार कर भगवान को भोग लगाया जाता है।
गोवर्धन पूजा 2026: जानिए शुभ मुहूर्त
रायपुर के पंचांग के अनुसार 10 नवंबर को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 11 मिनट पर होगा। गोवर्धन पूजा का प्रातःकालीन शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 11 मिनट से 8 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। प्रतिपदा तिथि 10 नवंबर को दोपहर करीब 2 बजे तक रहेगी। गोवर्धन पूजा के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के आंगन या पूजा स्थल पर गोबर अथवा मिट्टी से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएं। इसे फूलों और पत्तियों से सजाकर भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करें।
- गोवर्धन पर्वत की आकृति पर रोली, अक्षत और फूल चढ़ाएं।
- भगवान श्रीकृष्ण को धूप-दीप दिखाकर पूजा करें।
- फल, मिठाई और विभिन्न पकवानों का भोग लगाएं।
- गायों को स्नान कराकर या तिलक लगाकर उनकी पूजा करें और गुड़ व हरा चारा खिलाएं।
- गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करें और आरती के बाद प्रसाद वितरित करें।
पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को देवराज इंद्र की पूजा के बजाय गोवर्धन पर्वत और प्रकृति की पूजा करने का संदेश दिया था। इससे नाराज होकर इंद्र ने ब्रज में मूसलाधार बारिश शुरू कर दी। लगातार वर्षा से ब्रजवासियों को बचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया। इसके नीचे ब्रज के लोगों और उनके पशुओं ने शरण ली।
मान्यता है कि सात दिनों तक वर्षा करने के बाद इंद्र को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से क्षमा मांगी। इसी घटना की याद में हर साल कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा की जाती है।
अन्नकूट में लगाया जाता है 56 भोग
गोवर्धन पूजा के अवसर पर अन्नकूट तैयार करने की परंपरा है। इसमें कई तरह के अनाज, सब्जियां, मिठाइयां और पकवान शामिल किए जाते हैं। भगवान श्रीकृष्ण को छप्पन भोग अर्पित करने की भी परंपरा है। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना के साथ अन्नकूट का प्रसाद श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गोवर्धन पूजा प्रकृति, अन्न और पशुधन के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है।


