कवर्धा 8 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में अपनी 12 सूत्रीय मांगों को लेकर भारतीय किसान संघ ने गुरुवार को प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू किया। प्रदेश के लगभग सभी जिलों में किसान जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। डिप्टी सीएम विजय शर्मा के गृह जिला कवर्धा में किसानों ने ट्रैक्टरों के साथ रैली निकाली और कई जगह सड़क पर बैरिकेडिंग कर रास्ते रोक दिए। प्रदर्शन के कारण आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।सड़क जाम होने के कारण यातायात प्रभावित हुआ। कई लोग अस्पताल जाने के लिए परेशान होते नजर आए। कुछ लोगों ने खेतों के रास्ते से निकलने की कोशिश की। प्रदर्शन के दौरान एक एंबुलेंस भी जाम में फंस गई, हालांकि बाद में उसे रास्ता दिया गया।
गौरतलब है कि आज भारतीय किसान संघ के बैनर तले 12 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदेशव्यापी आदोलन किया गया। इसी कड़ी में डिप्टी सीएम विजय शर्मा के गृह जिला कवर्धा में भारतीय किसान संघ के कार्यकर्ता और किसान बड़ी संख्या में ट्रैक्टर लेकर सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की और कई स्थानों पर रास्ते को बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। प्रदर्शन के बीच जाम में फंसे एक राहगीर ने कहा, “पत्नी और बच्चे को अस्पताल लेकर जा रहे हैं, लेकिन सड़क जाम करके रखी गई है। मैं खुद भी किसान हूं। रास्ता नहीं दिया गया तो तोड़कर जाऊंगा।” एक अन्य राहगीर ने बताया कि वह छोटे बच्चे को अस्पताल लेकर जा रहा था, लेकिन प्रदर्शन के कारण रास्ते में फंस गया।
किसानों के आंदोलन के बीच आम लोगों की परेशानी का यह पहलू भी सामने आया है। हालांकि प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए आंदोलन जरूरी है। प्रदर्शन के बाद भारतीय किसान संघ की ओर से मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को 12 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा जाएगा। संघ ने किसानों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को इसमें शामिल किया है। इनमें प्रमुख रूप से 2022-23 की धान खरीदी की करीब 1700 करोड़ रुपये की लंबित राशि का भुगतान, धान का समर्थन मूल्य, सिंचाई, बिजली, गन्ने का मूल्य, गौ वंदन योजना और भूमि अधिग्रहण से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।
भारतीय किसान संघ का कहना है कि छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है, लेकिन प्रदेश का किसान अपनी उपज बेचने, खाद हासिल करने, उचित मूल्य पाने और प्राकृतिक आपदा की स्थिति में राहत लेने के लिए संघर्ष कर रहा है। संघ ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि किसानों की समस्याओं को केवल बैठकों और कागजों तक सीमित रखा गया, तो संगठन सड़क से लेकर शासन तक निर्णायक आंदोलन करने के लिए मजबूर होगा।
₹1700 करोड़ के लंबित भुगतान की मांग
किसान संघ ने सरकार से मांग की है कि वर्ष 2022-23 की धान खरीदी की किसानों की लंबित करीब 1700 करोड़ रुपये की राशि तत्काल जारी की जाए। संघ का कहना है कि किसानों की मेहनत की कमाई को वर्षों तक लंबित रखना स्वीकार नहीं किया जा सकता। भारतीय किसान संघ ने केंद्र सरकार से धान की खरीदी ₹3358 प्रति क्विंटल की दर से करने की मांग की है। संघ का कहना है कि इसमें पिछले तीन वर्षों में समर्थन मूल्य में हुई ₹258 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी का लाभ भी शामिल किया जाए। इसके साथ ही सब्जी और फल उत्पादक किसानों को भी कृषक उन्नति योजना के दायरे में लाने की मांग की गई है। धान खरीदी में वजन को लेकर भी किसान संघ ने सवाल उठाए हैं। संघ ने मांग की है कि प्रति बोरी अधिकतम 40 किलो 700 ग्राम ही धान लिया जाए और किसानों की उपज में मनमाने तरीके से अतिरिक्त वजन की कटौती बंद की जाए।
टोकन व्यवस्था में बदलाव की भी मांग
किसान संघ ने धान खरीदी की टोकन व्यवस्था में भी बदलाव की मांग की है। संघ के मुताबिक बड़े किसानों के लिए 5 टोकन, छोटे और सीमांत किसानों के लिए 3 और 1 टोकन की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि किसान अपनी पूरी उपज बेचने से वंचित न रहें। भारतीय किसान संघ के प्रदेशव्यापी आंदोलन से किसानों की मांगें एक बार फिर सरकार के सामने हैं। एक तरफ किसान लंबित भुगतान, समर्थन मूल्य और धान खरीदी व्यवस्था में बदलाव की मांग कर रहे हैं, वहीं कवर्धा में प्रदर्शन के दौरान सड़क जाम से आम लोगों को हुई परेशानी भी चर्चा में है। अब देखना होगा कि 12 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार क्या कदम उठाती है और किसानों के इस आंदोलन का आगे क्या असर होता है।


