रिसाली 6 अक्टूबर 2026। रिसाली नगर निगम चुनाव को लेकर कांग्रेस ने अपनी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी सिलसिले में हुई पार्टी की बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य की भाजपा सरकार पर कर्मचारियों और पेंशन से जुड़े मुद्दों को लेकर तीखा हमला बोला। बघेल ने आरोप लगाया कि सरकार के पास कर्मचारियों को तनख्वाह देने और पेंशन देने तक के लिए पैसा नहीं है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘गारंटी’ से जोड़ते हुए भाजपा सरकार से उसके वादों का हिसाब मांगने की कोशिश की। बघेल के इन आरोपों के बीच रिसाली नगर निगम चुनाव की सियासत भी गरमा गई है।
रिसाली नगर निगम चुनाव को लेकर कांग्रेस ने बैठक के जरिए बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने की रणनीति बनाई है, जबकि भाजपा सरकार की नीतियों और स्थानीय मुद्दों को चुनावी बहस का हिस्सा बनाने की तैयारी में है। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में भूपेश बघेल ने कहा कि भाजपा सरकार ने कर्मचारियों से जुड़े कई वादे किए थे, लेकिन उनके मुताबिक उन पर अमल नहीं हुआ। बघेल ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से कर्मचारियों के लिए 100 दिन में कलेक्टर दर पर भुगतान, मानदेय दोगुना करने और नियमितीकरण जैसी बातें कही गई थीं, इनमें से कोई भी वादा पूरा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि जिस ‘मोदी की गारंटी’ को लेकर भाजपा चुनाव मैदान में गई थी, अब उन्हीं मुद्दों पर सवाल उठ रहे हैं।
बृजमोहन अग्रवाल के पत्र को बनाया राजनीतिक मुद्दा
पेंशन के मुद्दे पर बघेल ने भाजपा सांसद और पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को लिखे हालिया पत्र का भी जिक्र किया। अग्रवाल ने अनुदान प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों के सेवानिवृत्त प्राध्यापकों और कर्मचारियों की पेंशन व ग्रेच्युटी व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री से इसे पूर्ववत बहाल रखने का आग्रह किया है। बघेल ने इसी पत्र को आधार बनाकर सरकार पर निशाना साधा और कहा कि जब भाजपा के ही नेता पेंशन बहाली की मांग कर रहे हैं, तो इससे सरकार की स्थिति को समझा जा सकता है। हालांकि, बृजमोहन अग्रवाल का पत्र विशेष रूप से अनुदान प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों के पेंशनर्स से संबंधित है; इसे सभी सरकारी कर्मचारियों की पेंशन व्यवस्था से जोड़ना अलग राजनीतिक दावा होगा।
वार्ड आरक्षण पर भी सरकार को घेरा
रिसाली और भिलाई नगर निगम के वार्ड आरक्षण को लेकर उठे सवालों पर भी बघेल ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एससी-एसटी वर्ग के आरक्षण को लेकर आपत्तियां उठाई गई थीं, लेकिन सरकार ने उन पर ध्यान नहीं दिया। बघेल ने कहा कि इस मामले को न्यायालय के सामने ले जाना चाहिए था। यह बयान ऐसे समय आया है जब नगरीय निकाय चुनाव की तैयारियां तेज हो रही हैं और वार्डवार समीकरण राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण हो गए हैं। जब बघेल से भाजपा के पास कथित तौर पर अधिक धनबल होने को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि जनता के सामने धनबल नहीं चलता। बघेल ने दावा किया कि जब जनता किसी मुद्दे को लेकर खड़ी होती है तो धनबल, बाहुबल और प्रशासनिक बल प्रभावी नहीं रहता। यह उनका राजनीतिक दावा है, जिसे कांग्रेस चुनावी माहौल में अपने पक्ष में जनता के समर्थन के संदेश के रूप में पेश कर रही है।
कांग्रेस का फोकस बूथ स्तर पर
रिसाली चुनाव पर्यवेक्षक मोहन मरकाम ने कहा कि कांग्रेस ने चुनावी तैयारियां शुरू कर दी हैं और अब संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय किया जाएगा। उन्होंने भाजपा सरकार पर नगर निगम क्षेत्रों में अपेक्षित विकास कार्य नहीं होने का आरोप लगाया और कहा कि कांग्रेस स्थानीय मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएगी। मरकाम के मुताबिक, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के दिशा-निर्देश कार्यकर्ताओं को बताए गए हैं और अब वार्ड तथा बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। टिकट वितरण को लेकर मोहन मरकाम ने कहा कि कांग्रेस की परंपरागत प्रक्रिया के तहत वार्ड स्तर से नाम लिए जाएंगे। इन नामों पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी विचार करेगी और योग्य उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
इस तरह रिसाली में कांग्रेस की पहली बड़ी बैठक में संगठन को बूथ तक मजबूत करने के साथ-साथ पेंशन, कर्मचारी हित, वार्ड आरक्षण और स्थानीय विकास को चुनावी मुद्दा बनाने के संकेत मिले हैं। रिसाली नगर निगम चुनाव से पहले भूपेश बघेल का पेंशन और ‘मोदी की गारंटी’ पर हमला कांग्रेस की चुनावी रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा दिखाई देता है। वहीं भाजपा की ओर से इन आरोपों का जवाब और स्थानीय निकाय में उसके कामकाज का मुद्दा आने वाले दिनों में चुनावी बहस को आकार दे सकता है। फिलहाल कांग्रेस ने संगठनात्मक स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। अब देखना होगा कि कर्मचारी-पेंशन के मुद्दे, वार्ड आरक्षण और स्थानीय विकास के सवाल रिसाली के चुनावी मैदान में कितना प्रभाव डालते हैं।


