रायपुर 4 अक्टूबर 2026। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर छत्तीसगढ़ में भी सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के मतदाता सूची को लेकर दिए बयान पर छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने पलटवार किया है। दोनों नेताओं के बयानों के बाद मतदाता सूची, चुनाव आयोग की भूमिका और SIR को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि “शुद्ध मतदाता सूची लोकतंत्र की आत्मा है।” उन्होंने सवाल उठाया कि जिस व्यक्ति की मृत्यु हो चुकी है, उसका नाम मतदाता सूची में क्यों रहे ? जो व्यक्ति किसी दूसरे स्थान पर जा चुका है, उसका नाम पुराने स्थान पर क्यों रहे ? एक ही व्यक्ति का नाम दो जगह क्यों हो और जो भारत का नागरिक नहीं है, उसका नाम भारतीय मतदाता सूची में क्यों रहे?
चौहान ने SIR को मतदाता सूची को शुद्ध और पारदर्शी बनाने की प्रक्रिया बताते हुए कहा कि पात्र मतदाता का नाम किसी भी स्थिति में नहीं छूटना चाहिए और अपात्र नाम सूची से हटाए जाने चाहिए। शिवराज सिंह चौहान के इसी बयान पर पूर्व डिप्टी सीएम टी.एस. सिंहदेव ने सोशल मीडिया के जरिए पलटवार किया। सिंहदेव ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची को शुद्ध करने के नाम पर SIR के जरिए लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। सिंहदेव ने लिखा कि मृत व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में नहीं रहना चाहिए, लेकिन उनके अनुसार चुनाव आयोग की व्यवस्था में “मुर्दे वोट डाल रहे हैं और जिंदा लोगों को मृत घोषित कर उनका वोट छीना जा रहा है।”उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर स्थानांतरित व्यक्ति दो जगह वोट कर रहे हैं तो इसके लिए जिम्मेदारी किसकी है ? सिंहदेव ने अपने बयान में बीजेपी नेताओं का भी जिक्र करते हुए सवाल खड़े किए।
‘घुसपैठिया है तो भारत में रह कैसे रहा ?’
सिंहदेव ने गैर-नागरिकों के नाम मतदाता सूची में होने के मुद्दे पर भी शिवराज सिंह चौहान से सवाल किया। उन्होंने कहा कि…अगर कोई व्यक्ति भारत का नागरिक नहीं है और घुसपैठिया है, तो वह भारत में रह कैसे रहा है और उसे यहां रहने की अनुमति किसने दी ? सिंहदेव ने इस मुद्दे को केंद्रीय गृह मंत्रालय से भी जोड़ते हुए गृह मंत्री की जवाबदेही पर सवाल उठाया। गौरतलब है कि SIR को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच मूल विवाद मतदाता सूची की शुद्धता के साथ-साथ इस प्रक्रिया के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रहने को लेकर है।
शिवराज सिंह चौहान का तर्क है कि मृत, डुप्लीकेट अथवा अपात्र नामों को मतदाता सूची से हटाना लोकतांत्रिक व्यवस्था की पारदर्शिता के लिए जरूरी है। दूसरी ओर, विपक्ष इस प्रक्रिया को लेकर आशंका जता रहा है कि कहीं वास्तविक और पात्र मतदाताओं के नाम सूची से बाहर न हो जाएं। हाल के दिनों में SIR को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक टकराव बढ़ा है। विपक्षी दल चुनाव आयोग की भूमिका और प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि सरकार और बीजेपी की ओर से मतदाता सूची को अपडेट और शुद्ध करने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है।
अब बयानबाजी के केंद्र में ‘वोटर लिस्ट’
शिवराज सिंह चौहान और टी.एस. सिंहदेव के बीच हुई यह बयानबाजी ऐसे समय सामने आई है जब SIR को लेकर देशभर में राजनीतिक बहस जारी है। एक तरफ मतदाता सूची से मृत, डुप्लीकेट और अपात्र नाम हटाने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष पात्र मतदाताओं के नाम हटने की आशंका को मुद्दा बना रहा है। ऐसे में SIR की प्रक्रिया, उसमें अपनाए जा रहे सत्यापन के तरीके और पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने की व्यवस्था आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का प्रमुख मुद्दा बनी रह सकती है।
लोकतंत्र की आत्मा, मतदाता सूची की हत्या तो ‘आपका’ चुनाव आयोग SIR से कर रहा है।
मृत व्यक्ति का नाम सूची में नहीं रहना चाहिए। लेकिन ‘आपके’ चुनाव आयोग की व्यवस्था में मुर्दे वोट डाल रहे हैं और ज़िंदा लोगों को मृत घोषित कर उनका वोट छीना जा रहा है।
स्थानांतरित व्यक्ति 2 जगह कैसे वोट कर रहे हैं इसका जवाब आपके साथी राकेश सिन्हा जी और BJP के वे तमाम नेता-कार्यकर्ता दे सकते हैं, जो चुनाव-दर-चुनाव देशभर में घूम-घूमकर वोट डालते हैं।
अगर कोई भारत का नागरिक नहीं है, घुसपैठिया है, तो भारत में रह कैसे रहा है? किसने उसे खुलेआम यहाँ रहने दिया? अगर यह सच में आपकी चिंता है, तो सबसे पहले अपने ही गृह मंत्री का इस्तीफा मांगिए।
‘आपका’ चुनाव आयोग भरपूर मात्रा में वोट चोरी करवाकर आपको सत्ता में ला रहा है – उसका बचाव तो आप करेंगे ही।
लेकिन यह भी सच है कि लोकतंत्र के साथ यह खिलवाड़ गैरकानूनी भी है और देशद्रोह से कम भी नहीं।
— T S Singhdeo (@TS_SinghDeo) October 3, 2026


