रायपुर 3 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर फिर सवाल उठाए हैं। 29 सितंबर 2026 को कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक के बाद बघेल ने आरोप लगाया कि कथित ‘वोट चोरी’ के मामले में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार केवल एक माध्यम हैं, जबकि इसका राजनीतिक लाभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को मिल रहा है।
CWC बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में बघेल ने आरोप लगाया कि EVM और मतदाता सूची के SIR के जरिए चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियां की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को अब केवल राजनीतिक मंचों तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि जनता के बीच लेकर जाएगी। बघेल ने यह भी कहा कि कांग्रेस की ओर से इस मुद्दे पर आंदोलन आगे जारी रहेगा। उनके मुताबिक, मतदाता सूची में नाम हटाए जाने और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता से जुड़े सवालों को लेकर पार्टी राज्य, जिला और बूथ स्तर तक अभियान चलाएगी।
CWC में SIR और चुनाव आयोग पर चर्चा
29 सितंबर को नई दिल्ली में हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में SIR, मतदाता सूचियों में बदलाव और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर पार्टी की आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। कांग्रेस ने मतदाता सूची में बदलाव से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक करने, हटाए गए मतदाताओं को जानकारी और अपील का अवसर देने तथा गंभीर विसंगतियों की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच जैसी मांगें उठाई हैं।कांग्रेस कार्यसमिति ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया को स्थगित करने की मांग भी रखी है। पार्टी ने दावा किया है कि बड़ी संख्या में नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। हालांकि, इन आंकड़ों और आरोपों पर चुनाव आयोग की स्थिति अलग है।
चुनाव आयोग का क्या कहना है ?
चुनाव आयोग SIR को मतदाता सूची को अपडेट करने की निर्धारित प्रक्रिया के तौर पर पेश करता रहा है। आयोग के अनुसार इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई पात्र मतदाता सूची से बाहर न रहे और कोई अपात्र व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल न हो। मार्च 2026 में आयोग ने भी SIR को पारदर्शी तरीके से संचालित किए जाने की बात कही थी। ECI के मौजूदा पोर्टल पर SIR-2026 से संबंधित मतदाता सेवाएं उपलब्ध हैं, जिनमें मतदाता सूची में नाम खोजने, आवेदन की स्थिति देखने, अपील करने और संबंधित दस्तावेज जमा करने की सुविधाएं शामिल हैं।
सियासी टकराव और तेज होने के संकेत
SIR को लेकर कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच विवाद अब राजनीतिक आंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस ने संसद से लेकर सड़क तक इस मुद्दे को उठाने की रणनीति बताई है, जबकि चुनाव आयोग अपनी प्रक्रिया को कानूनी और निर्धारित नियमों के तहत संचालित किए जाने की बात कह रहा है। इसी बीच, सुप्रीम कोर्ट ने CEC ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और SIR को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि SIR से जुड़े कुछ निर्णय आयोग के अन्य सदस्यों की सहमति के बिना लिए गए। ये याचिकाकर्ता के आरोप हैं और अदालत ने इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।
‘वोट चोरी’ और SIR को लेकर कांग्रेस के आरोपों ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बहस को तेज कर दिया है। एक ओर कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया और मतदाता अधिकारों से जोड़कर जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है, वहीं चुनाव आयोग SIR को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत चलाए जाने की बात कह रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में मतदाता सूची, SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सियासी टकराव और बढ़ने की संभावना है।


