नई दिल्ली 1 अक्टूबर 2026: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को लेकर जारी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने प्रक्रिया से जुड़े कुछ नियमों में बदलाव किया है। नए फैसलों के तहत मतदाता सूची में त्रुटियों से जुड़े मामलों में व्यक्तिगत सुनवाई की जरूरत को समाप्त करने और कुछ राज्यों में नए मतदाताओं के लिए फॉर्म-6 की शर्तों को आसान बनाने की बात सामने आई है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधु और विवेक जोशी के बीच हुई बैठक में कुछ अहम फैसले लिए गए हैं। ये फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब एसआईआर को लेकर बवाल हो रहा है। वहीं आंध्र प्रदेश और मेघालय में अंतिम मतदाता सूची जारी करने की तारीखों में भी बदलाव किया गया है।
फॉर्म-6 से माता-पिता की जानकारी वाली अतिरिक्त शर्त हटाई
चुनाव आयोग ने उन राज्यों में नए मतदाताओं के ऑनलाइन पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 से SIR से जुड़ा अतिरिक्त घोषणा पत्र हटाया है, जहां विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इस घोषणा पत्र में आवेदक या उसके माता-पिता के नाम पिछली SIR मतदाता सूची में दर्ज होने से संबंधित जानकारी मांगी जा रही थी। यह बदलाव आयोग के ECINET पोर्टल पर किया गया है। फॉर्म-6 का इस्तेमाल नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए किया जाता है। इस बदलाव से संबंधित राज्यों में नए वोटर बनने के लिए आवेदन करने वाले लोगों को अतिरिक्त घोषणा पत्र भरने की जरूरत नहीं होगी।
आंध्र प्रदेश और मेघालय में बढ़ी समयसीमा
चुनाव आयोग ने आंध्र प्रदेश और मेघालय में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण कार्यक्रम की समयसीमा भी बढ़ा दी है। आयोग की आधिकारिक घोषणा के अनुसार नई तारीखें इस प्रकार हैं।
आंध्र प्रदेश: दावे और आपत्तियों के निपटारे की प्रक्रिया 10 अक्टूबर 2026 तक चलेगी। अंतिम मतदाता सूची 16 अक्टूबर को प्रकाशित होगी।
मेघालय: अंतिम मतदाता सूची अब 26 अक्टूबर 2026 को जारी की जाएगी। ये फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधु तथा विवेक जोशी की बैठक में लिए गए।
SIR प्रक्रिया और सॉफ्टवेयर पर भी उठे सवाल
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान इस्तेमाल किए जा रहे फॉर्म और ऑनलाइन व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे हैं। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, फॉर्म-6 में अतिरिक्त घोषणा जोड़े जाने को लेकर कानूनी प्रक्रिया पर आपत्तियां सामने आई थीं। इसके बाद आयोग ने SIR पूरा कर चुके राज्यों में ऑनलाइन फॉर्म से संबंधित अतिरिक्त घोषणा हटाई। व्यक्तिगत सुनवाई के मामले में यह ध्यान रखना जरूरी है कि आयोग की सामान्य FAQ के अनुसार, मतदाता पंजीकरण के मामलों में व्यक्तिगत उपस्थिति आम तौर पर आवश्यक नहीं होती। हालांकि, SIR के दौरान नोटिस या रिकॉर्ड में विसंगति वाले मामलों की सुनवाई अलग प्रक्रिया के तहत हो सकती है। इसलिए सभी मामलों में व्यक्तिगत सुनवाई पूरी तरह समाप्त होने का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
SIR को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच फैसला
मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों की ओर से सवाल उठाए जाते रहे हैं। ऐसे में फॉर्म से अतिरिक्त शर्त हटाने और दो राज्यों में समयसीमा बढ़ाने के फैसले को प्रक्रिया में किए गए प्रशासनिक बदलावों के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि इन बदलावों से सभी मतदाताओं को कितनी राहत मिलेगी, यह संबंधित राज्यों में लागू नियमों और मामलों की प्रकृति पर निर्भर करेगा। अब नजर इस बात पर रहेगी कि आयोग आगे SIR प्रक्रिया को लेकर क्या दिशा-निर्देश जारी करता है और मतदाता सूची में नाम जुड़वाने या गलतियां सुधरवाने की प्रक्रिया को किस तरह लागू किया जाता है।


