भिलाई 22 सितंबर 2026। कोयला लेवी मामले से जुड़ी संपत्तियों पर आयकर विभाग की बेनामी संपत्ति प्रभाग ने एक बार फिर कार्रवाई की है। सोमवार को रायपुर की बेनामी संपत्ति यूनिट की टीम ने भिलाई के कोहका स्थित सूर्या रेसीडेंसी के मकान नंबर A-1 पर भौतिक कब्जा लेकर उसे सील कर दिया। कार्रवाई के दौरान सुपेला पुलिस की मौजूदगी रही और बाद में मौके पर ढोल बजाकर मुनादी भी कराई गई। आयकर विभाग की यह कार्रवाई बेनामी संपत्ति लेन-देन निषेध अधिनियम के तहत की गई है। विभाग की ओर से मकान पर सूचना बोर्ड भी लगाया गया है।
जानकारी के मुताबिक रिकॉर्ड में सामने आई जांच एजेंसियों की जानकारी के मुताबिक, सूर्या रेसीडेंसी का A-1 मकान मनीष उपाध्याय के नाम से जुड़ा है, लेकिन जांच में इसे सूर्यकांत तिवारी से संबंधित कथित बेनामी संपत्ति बताया गया है। न्यायिक रिकॉर्ड में जांच एजेंसियों के हवाले से कहा गया है कि मनीष उपाध्याय इसी मकान में रहता था और यह संपत्ति सूर्यकांत तिवारी द्वारा उसके लिए खरीदे जाने का दावा जांच में किया गया था। रिकॉर्ड में यह भी कहा गया है कि मनीष उपाध्याय ने संपत्ति खरीदने के लिए सूर्यकांत तिवारी से जुड़ी फर्म से लिए गए करीब ₹40 लाख के कथित असुरक्षित ऋण की बात कही थी। जांच एजेंसियों ने इस लेन-देन को वास्तविक ऋण नहीं मानते हुए अलग निष्कर्ष दर्ज किए हैं।
डायरी की एंट्री भी जांच का हिस्सा
न्यायिक रिकॉर्ड में जांच एजेंसियों के हवाले से यह भी उल्लेख है कि आयकर विभाग की तलाशी में जब्त डायरी में मनीष उपाध्याय के नाम से जुड़ी रकम और कोड की एंट्री मिली थी। एक न्यायिक रिकॉर्ड में जांच एजेंसियों ने मनीष उपाध्याय को सौर्या चौरसिया के आवास के पड़ोसी के रूप में भी बताया है और उसके नाम से रकम की एंट्री मिलने का उल्लेख किया है। इन्हीं जांच निष्कर्षों के आधार पर बेनामी संपत्ति प्रभाग ने अब A-1 पर आगे की कार्रवाई करते हुए संपत्ति का भौतिक कब्जा अपने हाथ में ले लिया और मकान सील कर दिया।
A-22 पर भी IT विभाग की कार्रवाई
इसी सूर्या रेसीडेंसी परिसर में A-22 संपत्ति पर भी बेनामी संपत्ति अधिनियम के तहत कार्रवाई का नोटिस लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड में A-21/22 संपत्ति को सौम्या चौरसिया के परिवार से संबंधित बताया गया है। रिकॉर्ड के मुताबिक संबंधित संपत्ति उनके पति सौरभ मोदी और मां शांति देवी चौरसिया के नाम से जुड़ी थी। हालांकि, इन संपत्तियों से जुड़े आरोप और जांच एजेंसियों के निष्कर्ष अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं हैं। संबंधित मामलों की कानूनी प्रक्रिया अभी अलग-अलग स्तरों पर जारी है।
इस पूरी कार्रवाई में आयकर विभाग का मुख्य फोकस यह पता लगाने पर है कि संपत्ति वास्तव में किसके पैसे से खरीदी गई, संपत्ति के नाम पर कौन है और उसका वास्तविक लाभार्थी कौन है। बेनामी संपत्ति कानून के तहत किसी संपत्ति को बेनामी मानने की प्रक्रिया में वास्तविक स्वामित्व, खरीद की रकम और लेन-देन की परिस्थितियां महत्वपूर्ण होती हैं। आयकर विभाग की आधिकारिक जानकारी के अनुसार बेनामी संपत्ति से संबंधित जानकारी विभाग को दी भी जा सकती है।
सोमवार की कार्रवाई के बाद सूर्या रेसीडेंसी का A-1 मकान अब आयकर विभाग की कार्रवाई के दायरे में है। टीम ने संपत्ति को सील करने के साथ मौके पर सूचना बोर्ड लगाया और स्थानीय पुलिस की मौजूदगी में प्रक्रिया पूरी की। यानी कोयला लेवी मामले की जांच में अब सिर्फ पूछताछ और दस्तावेजों की जांच तक मामला सीमित नहीं है, बल्कि कथित बेनामी संपत्तियों पर आयकर विभाग की कार्रवाई जमीन पर भी दिखाई देने लगी है।


