रायपुर 21 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ में डीजे और ध्वनि प्रदूषण को लेकर हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के बीच पुलिस की जमीनी कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। एक तरफ पुलिस और प्रशासन नियमों के पालन का दावा कर रहे हैं, गणेश उत्सव के दौरान डीजे को लेकर विवाद और हिंसा की घटनाएं सामने आ रही हैं। वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण पुलिस चाहकर भी कानून की धज्जियां उड़ाने वालों पर एक्शन लेने में लाचार नजर आ रही है। बिलासपुर में डीजे पर नाचने को लेकर हुए विवाद में एक युवक की हत्या और कोरबा के दादर क्षेत्र में डीजे को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद के बाद पुलिस चौकी के घेराव की घटना ने प्रदेशभर में नियमों के अमल और स्थानीय स्तर पर पुलिस की भूमिका और लाचारी को चर्चा में ला दिया है।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में ध्वनि प्रदूषण और डीजे के इस्तेमाल को लेकर न्यायिक निर्देशों के अनुपालन का मुद्दा लगातार चर्चा में रहा है। वहीं बिलासपुर में एक सप्ताह के भीतर डीजे विवाद से जुड़ी दो हत्या की घटनाओं ने कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल के दिनों में कोरबा पुलिस की ओर से नियमों का उल्लंघन करने वाले डीजे संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की खबरें भी सामने आई हैं। मानिकपुर क्षेत्र में पुलिस ने नियमों के विपरीत डीजे बजाने पर उपकरण और वाहन जब्त करने की कार्रवाई की थी। इसी बीच रविवार शाम कोरबा के दादर क्षेत्र में डीजे बजाने को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए। विवाद बढ़ने पर सैकड़ों लोग मानिकपुर पुलिस चौकी पहुंच गए और चौकी का घेराव कर दिया।
स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि पुलिस की सख्ती के बीच राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण डीजे के खिलाफ समय रहते कार्रवाई नहीं हो सकी, जिसके बाद विवाद बढ़ गया। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यदि पुलिस ने समय रहते भीड़ को नियंत्रित नहीं किया होता, तो विवाद और हिंसक रूप ले सकता था और कोई अप्रिय घटना हो सकती थी। ऐसे में सवाल सिर्फ डीजे पर कार्रवाई का नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को समय पर और निष्पक्ष कार्रवाई का अधिकार मिलने का भी है। कुल मिलाकर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में डीजे को लेकर सामने आ रहे विवादों के बीच नियमों के समान रूप से पालन और पुलिस पर किसी भी तरह के बाहरी दबाव की शिकायतों की निष्पक्ष जांच जरूरी हो गई है। यदि राजनीतिक या अन्य किसी प्रकार का हस्तक्षेप कार्रवाई में बाधा बन रहा है, तो यह पुलिस व्यवस्था के साथ-साथ कानून के समान अनुपालन के लिए भी गंभीर चिंता का विषय हो सकता है।
पुलिस के सामने दोहरी चुनौती
बिलासपुर की हिंसक घटना और कोरबा के विवादों ने एक व्यापक सवाल जरूर खड़ा किया है कि जब डीजे और ध्वनि प्रदूषण को लेकर नियम और न्यायिक निर्देश स्पष्ट हैं, तो हर आयोजन और हर क्षेत्र में उनका प्रभावी पालन आखिर कैसे सुनिश्चित किया जा रहा है ? सूत्रों के मुताबिक पुलिस और प्रशासन के अधिकारी अपने स्तर पर डीजे के लिए वैध अनुमति देने से भले ही बच रहे हैं, लेकिन राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते आयोजक समितियों को अपनी जिम्मेदारी पर डीजे बजाने की अनुमति दिए जाने जैसी स्थिति बन रही है। ऐसे में संबंधित अधिकारी भी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते नजर आते हैं।
नियमों के पालन की निगरानी और समय रहते कार्रवाई में कथित ढिलाई का नतीजा यह है कि न्यायधानी बिलासपुर समेत प्रदेश के कई हिस्सों में डीजे और ध्वनि विवाद से जुड़े हिंसक मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें हत्या से लेकर जानलेवा हमले तक की घटनाएं शामिल हैं।अब बड़ा सवाल यह है कि क्या पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई केवल विवाद या हिंसा होने के बाद शुरू होगी, या फिर आयोजनों से पहले ही प्रभावी निगरानी और सख्त अनुपालन के जरिए ऐसी घटनाओं को रोकने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी ? आने वाले दिनों में पुलिस और प्रशासन की जमीनी कार्रवाई इस सवाल का जवाब देगी।


