महासमुंद 20 सितंबर 2026। महासमुंद जिले के एक सरकारी स्कूल में वेतन भुगतान से जुड़ी बड़ी अनियमितता का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि यहां पदस्थ सहायक ग्रेड-2 लिपिक ने डिजिटल सिग्नेचर का इस्तेमाल कर अपने पदनाम को बदलकर खुद को व्याख्याता एलबी के रूप में दर्ज कर लिया और करीब आठ महीने तक बढ़ा हुआ वेतन प्राप्त करता रहा। इस प्रक्रिया में शासन को करीब 13 लाख रुपये का नुकसान होने की बात सामने आई है। मामले का खुलासा होने के बाद लिपिक को पूर्व में ही निलंबित कर दिया गया था। जांच रिपोर्ट आने के बाद अब लोक शिक्षण संचालनालय ने स्कूल के प्रभारी प्राचार्य और सहायक ग्रेड 2 लिपिक पर निलंबन की कार्रवाई की है।
जानकारी के मुताबिक ये पूरा मामला शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिरपुर का है। बताया जा रहा है कि यहां विद्यायल में सहायक ग्रेड-2 लिपिक के पद पर नारायण प्रसाद निर्मलकर की पदस्थापना थी। जिन्होने डिजिटल सिग्नेचर का इस्तेमाल कर अपने पदनाम को बदलकर खुद को व्याख्याता एलबी के रूप में दर्ज कर करीब 13 माह तक व्याख्याता का वेतन आहरण किया जाता रहा। जनवरी 2026 में संचालनालय कोष एवं लेखा की निगरानी के दौरान सिरपुर स्कूल से अपेक्षाकृत अधिक वेतन आहरण का मामला सामने आया। इसके बाद जांच की गई तो पता चला कि स्कूल में वेतन तैयार करने का काम देखने वाले लिपिक नारायण प्रसाद निर्मलकर ने अपने ही पदनाम में बदलाव कर लिया था।
बताया गया कि एक अन्य व्याख्याता को भी निर्धारित वेतन से अधिक भुगतान हुआ था। मामला सामने आने के बाद विभाग ने तत्काल लिपिक के खिलाफ कार्रवाई की। डीईओ कार्यालय से जारी पत्र के अनुसार, नारायण प्रसाद निर्मलकर ने मई 2025 से दिसंबर 2025 के बीच अपने मूल पदनाम लेवल-06 में बदलाव कर उसे व्याख्याता एलबी लेवल-09 कर दिया। इसके साथ ही वेतन निर्धारण में भी बढ़ोतरी कर ली गई। बताया गया है कि निर्मलकर स्कूल के कर्मचारियों का वेतन तैयार करता था। आरोप है कि उसने तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य उमा ठाकुर से डिजिटल सिग्नेचर कराकर कोषालय से वेतन आहरित कराया। जांच के अनुसार इस प्रक्रिया से शासन को करीब 13 लाख रुपये की आर्थिक क्षति हुई।
प्राचार्य से लेकर अधिकारियों तक निगरानी पर सवाल
मामले के सामने आने के बाद स्कूल से लेकर जिला स्तर तक वेतन भुगतान की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। करीब आठ महीने तक बढ़ा हुआ वेतन आहरित होता रहा, लेकिन ऑनलाइन रिकॉर्ड के मिलान के दौरान यह गड़बड़ी सामने नहीं आई।बीईओ और डीईओ कार्यालय स्तर पर वेतन संबंधी रिकॉर्ड की जांच के साथ-साथ जिला कोषालय में प्रस्तुत होने वाले वेतन पत्रकों की प्रक्रिया पर भी सवाल उठे हैं। विभागीय जांच में अब संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।
कलेक्टर के निर्देश के बाद भी नहीं दर्ज हो सका FIR
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी विजय कुमार लहरे ने 27 जनवरी को नारायण प्रसाद निर्मलकर को निलंबित कर बीईओ कार्यालय से संबद्ध कर दिया था। मामला आर्थिक अनियमितता से जुड़ा होने के कारण कलेक्टर विनय कुमार ने एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश भी दिए थे। हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार अब तक इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। इस पूरे मामले में अब लोक शिक्षण संचालनालय की ओर से 18 सितंबर को जारी आदेश में प्रभारी प्राचार्य उमा ठाकुर और सहायक ग्रेड-2 अकील मोहम्मद खान को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। आदेश में निलंबित लिपिक नारायण प्रसाद निर्मलकर की भूमिका के साथ दोनों की प्रारंभिक संलिप्तता का उल्लेख किया गया है।
कार्रवाई में संचालनालय कोष, लेखा एवं पेंशन के पत्र का भी संदर्भ दिया गया है। विभाग ने निलंबन की कार्रवाई छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9(1)(क) के तहत की है। निलंबन अवधि में दोनों को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा। उनका मुख्यालय जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, महासमुंद निर्धारित किया गया है। अब विभागीय जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि पदनाम और वेतन में बदलाव किस प्रक्रिया से हुआ, डिजिटल सिग्नेचर का इस्तेमाल किस स्तर पर किया गया और करीब 13 लाख रुपये की कथित आर्थिक क्षति के लिए कौन-कौन जिम्मेदार है। मामले में एफआईआर और शासकीय राशि की वसूली को लेकर भी आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्ष पर निर्भर करेगी।


