कोरबा 6 अगस्त 2026। सरकारी योजनाओं और निर्माण कार्यों की जमीनी हकीकत जानने कोरबा कलेक्टर कुणाल दुदावत का फील्ड विजिट लगातार चर्चा में है। कलेक्ट्रेट की बैठकों तक सीमित रहने के बजाय वे खुद दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों का दौरा कर योजनाओं की प्रगति पर नजर रख रहे हैं। इसी क्रम में पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर का सख्त प्रशासनिक अंदाज देखने को मिला, जहां आदिवासी छात्रों के लिए बन रहे 100 सीटर बालक आश्रम का निर्माण तय समय पर पूरा नहीं होने पर उन्होंने मौके पर ही ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई। कलेक्टर के इस सख्त रुख से जहां प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है, वहीं आम लोग उनके एक्शन की खुलकर सराहना कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि समय पर निर्माण कार्य पूरा कराने और लापरवाही पर सख्ती बरतने के लिए ऐसे ही प्रशासनिक तेवर की जरूरत है।
दरअसल आदिवासी बहुल कोरबा के वनांचल क्षेत्र में संचालित निर्माण कार्यों की वास्तविक स्थिति जानने कलेक्टर कुणाल दुदावत बुधवार को पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड पहुंचे थे। उन्होंने शिक्षा, आदिवासी विकास, स्वास्थ्य और महिला एवं बाल विकास विभाग से जुड़े निर्माण कार्यों का मौके पर निरीक्षण किया और गुणवत्ता तथा प्रगति की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर अधूरे कार्यों और धीमी प्रगति पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों को समय-सीमा में कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान सबसे ज्यादा नाराजगी पोड़ी उपरोड़ा में निर्माणाधीन 100 सीटर बालक आश्रम को लेकर देखने को मिली। यह भवन जनवरी 2026 तक तैयार हो जाना था, लेकिन तय समयावधि से 6 महीने से भी अधिक समय बीत जाने के बावजूद निर्माण कार्य अधूरा मिला।
कलेक्टर ने मौके पर ही ठेकेदार से निर्माण कार्य में विलंब की जानकारी ली, उन्होने पूछा कि…क्या निर्माण कार्य का भुगतान लंबित है। जब ठेकेदार ने बताया कि भुगतान लंबित नहीं है, तो कलेक्टर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “जब भुगतान मिल चुका है, तो फिर निर्माण समय पर पूरा क्यों नहीं हुआ ?” इसके बाद उन्होंने ठेकेदार को तीन महीने के भीतर निर्माण कार्य हर हाल में पूरा करने का सख्त अल्टीमेटम दिया। साथ ही निर्माण कार्य की निगरानी में लापरवाही पाए जाने पर आदिवासी विकास विभाग के एसडीओ और सब इंजीनियर को नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए। कलेक्टर यहीं नहीं रुके। उन्होंने लमना में निर्माणाधीन हायर सेकेंडरी और माध्यमिक शाला भवन का भी निरीक्षण किया। भवन की गुणवत्ता, अधूरे कार्य और तकनीकी मानकों की समीक्षा करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण में केवल स्वीकृत सामग्री का ही उपयोग किया जाए।
उन्होंने विद्यालय में प्रयोगशाला और पुस्तकालय भवन के लिए शीघ्र प्रस्ताव तैयार करने तथा पुराने भवन में सीपेज, लीकेज और अन्य मरम्मत कार्य तत्काल कराने के निर्देश दिए। समेलीभांठा के प्राथमिक विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र के निरीक्षण के दौरान भी कलेक्टर ने भवन की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने रंग-रोगन, टाइल्स लगाने, सीपेज की मरम्मत और अन्य आवश्यक सुधार कार्यों के लिए तत्काल प्रस्ताव तैयार कर प्रस्तुत करने को कहा, ताकि बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जा सके। आपको बता दे कोरबा कलेक्टर कुणाल दुदावत लगातार जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में पहुंचकर शासन की फ्लैगशिप योजनाओं और विकास कार्यों की जमीनी समीक्षा कर रहे हैं।
शिक्षा, स्वास्थ्य, आदिवासी विकास और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मामलों में उनकी सक्रियता के साथ ही लापरवाह अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संदेश भी लगातार सामने आ रहा है। कलेक्टर के इस दौरे और मौके पर दिखाई गई सख्ती का वीडियो भी चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रशासनिक हलकों में जहां इसे जवाबदेही तय करने की कड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है, वहीं आम लोगों का मानना है कि विकास कार्यों में देरी और गुणवत्ता से समझौता करने वालों के खिलाफ ऐसी सख्ती ही योजनाओं को समय पर धरातल तक पहुंचाने में कारगर साबित होगी।

