बिलासपुर 2 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सरकारी स्कूलों में मंत्रोच्चार कराए जाने संबंधी राज्य शासन के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका कोे खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि….रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं किया गया है, जिससे यह साबित हो सके कि आदेश का वास्तविक रूप से पालन शुरू हो चुका है। ऐसे में इस स्तर पर न्यायिक हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष अब्दुल सलमान रिज़वी की ओर से हाईकोर्ट में दायर की गई थी। याचिका में राज्य सरकार के सराकरी स्कूलों में मंत्रोच्चार कराये जाने के आदेश को चुनौती दी गयी थी। साथ ही इसेे संविधान के प्रावधानों के विपरीत बताते हुए उसे निरस्त करने की मांग की गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान सिंगल बेंच ने दलील दी कि……केवल आदेश जारी होने के आधार पर हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।
यह दिखाना जरूरी है कि आदेश का पालन वास्तव में स्कूलों में कराया जा रहा है। चूंकि याचिकाकर्ता की ओर से ऐसा कोई ठोस प्रमाण रिकॉर्ड पर प्रस्तुत नहीं किया गया, इसलिए फिलहाल राहत देने का आधार नहीं बनता। याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता डॉ. अमीर खान ने बताया कि अदालत ने स्पष्ट किया है कि आदेश के क्रियान्वयन के पर्याप्त साक्ष्य पेश किए बिना मामले में हस्तक्षेप संभव नहीं है।
फिलहाल सरकार के आदेश पर रोक नहीं
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद फिलहाल राज्य सरकार के आदेश पर कोई न्यायिक रोक नहीं लगी है। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि भविष्य में आदेश के क्रियान्वयन के प्रमाण सामने आते हैं, तो इस पूरे मामले की दोबारा न्यायिक समीक्षा की जा सकती है।

