जगदलपुर 29 जुलाई 2026। सरकारी स्कूलों की बदहाल तस्वीरें अक्सर सुर्खियां बनती हैं, लेकिन बस्तर से सामने आई यह तस्वीर व्यवस्था की खामियों के बीच शिक्षकों के समर्पण की मिसाल भी है। उफनती नदी, तेज बहाव और जानलेवा सफर….इन सबके बीच एक छोटी सी डोंगी के सहारे शिक्षक हर दिन स्कूल पहुंच रहे हैं। ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। लेकिन विडंबना यह है कि जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंचने वाले इन शिक्षकों को अब ऑनलाइन हाजिरी की बाध्यता भी परेशान कर रही है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो ने न सिर्फ शिक्षकों की बेबसी को सामने ला दिया है, बल्कि सरकारी व्यवस्था पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इस वीडियो को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भी राज्य सरकार पर निशाना साधा है।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में मानसून पूरे शबाब पर है, प्रदेश के अधिकांश इलाकों में नदी-नाले उफान पर है। ऐसे में बस्तर में भी लगातार हो रही बारिश से नदी-नाले पूरे उफान पर है। बस्तर संभाग के नारायणपुर, कांकेर, बीजापुर और सुकमा जिलों में करीब 200 ऐसे स्कूल हैं, जहां बरसात के दिनों में पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं होता। कई गांवों का सड़क संपर्क टूट जाता है और मोबाइल नेटवर्क भी पूरी तरह ठप हो जाता है। कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा विकासखंड में 24 शिक्षक रोजाना उफनती कोटरी नदी को डोंगी के सहारे पार कर स्कूल पहुंचते हैं। अबूझमाड़ से लगे छोटे बेठिया संकुल के एक दर्जन से अधिक स्कूलों में पदस्थ शिक्षकों के लिए यही रोज की दिनचर्या है।
नदी पर पुल नहीं होने के कारण डोंगी ही उनका एकमात्र सहारा है। तेज बहाव के दौरान कई बार घंटों तक नाव का इंतजार करना पड़ता है, जबकि सुरक्षा के लिए लाइफ जैकेट जैसी कोई व्यवस्था भी उपलब्ध नहीं है। रोज के इस जोखिम भरे सफर के बीच एक शिक्षक ने उफनती नदी को डोंगी से पार करते वक्त एक वीडियों बनाकर सोशल मीडिया में वायरल कर दिया। इस वीडियों में डोंगी में सवार शिक्षकों ने अपनी जवाबदारी और तकलीफ दोनों ही चीजों से लोगों को रूबरू कराया।
जान जोखिम में, फिर भी बच्चों की पढ़ाई नहीं रुकने देते
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक शिक्षक कहते सुनाई देते हैं, “देख लो यार… अब बताओ वीएसके ऐप में अटेंडेंस कैसे लगाएं ? हमारी परेशानी भी समझो।” इसके तुरंत बाद दूसरे शिक्षक की आवाज आती है, “बहुत बाढ़ है सर… डर लग रहा है।” इन कुछ शब्दों में बस्तर के दुर्गम इलाकों में कार्यरत शिक्षकों की पूरी कहानी छिपी है। उनका कहना है कि कई जगह मोबाइल नेटवर्क नहीं मिलता, जिसके कारण समय पर VSK ऐप में ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती। इससे वेतन कटने की आशंका बनी रहती है।
रोज का सफर किसी परीक्षा से कम नहीं
प्राथमिक शाला कोपिनगुंडा के सहायक शिक्षक इमरान खान बताते हैं कि वे रोज करीब दो घंटे पहले घर से निकलते हैं। पहले तीन से चार किलोमीटर बाइक से नदी तक पहुंचते हैं। फिर डोंगी से नदी पार करते हैं। दूसरी ओर तीन से चार किलोमीटर पैदल चलकर दूसरी बाइक तक पहुंचते हैं और वहां से दो से तीन किलोमीटर का सफर तय कर स्कूल पहुंचते हैं। मिडिल स्कूल कंदाड़ी के शिक्षक राजेश खरे कहते हैं कि बरसात में यह भरोसा भी नहीं रहता कि शाम को सुरक्षित घर लौट पाएंगे या नहीं। वहीं प्राथमिक शाला बांगो कोडिया की शिक्षिका श्यामा ठाकुर का कहना है कि बारिश के चार महीने पूरा इलाका लगभग कट जाता है। उन्होंने प्रशासन से लाइफ जैकेट, सुरक्षित नाव संचालन और पुल बनने तक वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की है।
विभाग ने कहा- समाधान तलाशा जाएगा
सोशल मीडिया में शिक्षकों का वीडियों वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया है। बस्तर संभाग के संयुक्त संचालक एच.आर. सोम ने कहा कि बरसात के दौरान कई शिक्षक नाव से नदी पार कर स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की समस्याओं और मांगों से उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा। साथ ही दुर्गम क्षेत्रों में ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था को लेकर व्यावहारिक समाधान पर भी विचार किया जा रहा है।
वीडियो पर सियासत भी तेज
वायरल वीडियो को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने राज्य सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि…“डबल इंजन के दावों की हकीकत देखिए! शिक्षक जान जोखिम में डालकर नाव से नदी पार कर स्कूल पहुंच रहे हैं, लेकिन सरकार को सिर्फ़ ऑनलाइन अटेंडेंस की चिंता है। पहले व्यवस्था दीजिए, फिर जवाबदेही मांगिए।” आपको बता दे बस्तर के ये शिक्षक हर दिन यह साबित कर रहे हैं कि शिक्षा उनके लिए सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि एक सामाजिक जिम्मेदारी है। लेकिन सवाल यह है कि क्या व्यवस्था भी उनके इस समर्पण के प्रति उतनी ही संवेदनशील है ? जब एक शिक्षक उफनती नदी पार कर बच्चों तक पहुंचता है और फिर नेटवर्क नहीं मिलने पर अपनी उपस्थिति दर्ज न होने की चिंता करता है, तब यह सिर्फ एक प्रशासनिक समस्या नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की परीक्षा भी है, जो शिक्षा को प्राथमिकता देने का दावा करती है।
डबल इंजन के दावों की हकीकत देखिए!
शिक्षक जान जोखिम में डालकर नाव से नदी पार कर स्कूल पहुंच रहे हैं, लेकिन सरकार को सिर्फ़ ऑनलाइन अटेंडेंस की चिंता है।
पहले व्यवस्था दीजिए, फिर जवाबदेही मांगिए। pic.twitter.com/cRq2uKOr8l
— INC Chhattisgarh (@INCChhattisgarh) July 29, 2026

