कोरबा 18 जुलाई 2026। कोरबा जिले में सीएसईबी पश्चिम के बंद पड़े लोतलोता राखड़ बांध को दोबारा संचालित करने की तैयारी के बीच बिजली उत्पादन कंपनी के एक अधिकारी के कथित बयान को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। वायरल वीडियों में ग्रामीण बंद राखड़ बांध को दोबारा शुरू करने का विरोध कर रहे है। बातचीत के दौरान ही अतिरिक्त मुख्य अभियंता ग्रामीणों से कहते हुए नजर आ रहे है कि….काम तो शुरू होगा, अब मारना बोलो तो मारेंगे! अधिकारी के इस बयान के बाद ग्रामीण भड़क गये। ग्रामीणों का आरोप है कि काम शुरू कराने पहुंचे अधिकारी ने बातचीत के दौरान ऐसा बयान दिया, जिसे उन्होंने धमकी के तौर पर लिया। हालांकि, विरोध बढ़ने पर अधिकारी ने तुरंत यूटर्न ले लिया और कहा कि उनकी बात का गलत अर्थ निकाला गया है। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
जानकारी के मुताबिक, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी (एचटीपीएस) के अधिकारी और कर्मचारी शुक्रवार को लोतलोता स्थित बंद राखड़ बांध में दोबारा काम शुरू कराने पहुंचे थे। लेकिन मौके पर पहले से मौजूद ग्रामीणों ने काम शुरू करने का विरोध किया। उनका कहना था कि पहले कंपनी उनकी वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान करे, उसके बाद ही किसी नए काम की शुरुआत की जाए। बातचीत के दौरान एचटीपीएस के अतिरिक्त मुख्य अभियंता राजेश पांडे भी सुरक्षा कर्मियों और अन्य अधिकारियों के साथ मौजूद थे।ग्रामीणों का आरोप है कि चर्चा के दौरान अधिकारी ने कहा, “काम तो आज शुरू होगा… अब चाहे मारना बोलो तो मारेंगे।” इस कथित बयान के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया और ग्रामीणों ने इसका विरोध शुरू कर दिया।
हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद अतिरिक्त मुख्य अभियंता राजेश पांडे ने सफाई देते हुए कहा कि उनकी बात को गलत तरीके से समझा गया। उनके अनुसार, उनका आशय यह था कि यदि काम करते समय उनके कर्मचारियों को मार भी खाना पड़े, तब भी वे काम करेंगे। उन्होंने कहा कि किसी को धमकाने का उनका कोई इरादा नहीं था। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। हालांकि, बयान के अलग-अलग अर्थ निकाले जा रहे हैं। वहीं स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि लोतलोता राखड़ बांध को वर्ष 2023 में बंद कर दिया गया था। उस समय बांध में मिट्टी भराई की गई, पौधरोपण कराया गया और राख परिवहन के लिए बिछाई गई पाइपलाइन भी हटा दी गई थी। अब अचानक उसी स्थान पर दोबारा काम शुरू किए जाने से लोगों में आशंका बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि वे विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा और आजीविका से जुड़े सवालों का जवाब पहले मिलना चाहिए।
झाबू हादसे की याद आज भी जिंदा
ग्रामीणों का कहना है कि 21 अप्रैल को झाबू राखड़ बांध टूटने की घटना में एक युवक की मौत हुई थी। इस हादसे ने राखड़ बांधों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे। ऐसे में वे चाहते हैं कि नई परियोजना शुरू करने से पहले सुरक्षा, पर्यावरण और स्थानीय लोगों की चिंताओं पर स्पष्ट जवाब दिया जाए। बताया जा रहा है कि कंपनी के अधिकारियों ने ग्रामीणों से उनकी मांगें लिखित रूप में देने को कहा है और आगे बैठक कर समाधान निकालने का भरोसा भी दिया है। फिलहाल काम शुरू करने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
सवाल सिर्फ बयान का नहीं, भरोसे का भी है
इस पूरे घटनाक्रम में अधिकारी के कथित बयान पर विवाद अपनी जगह है, लेकिन उससे बड़ा मुद्दा ग्रामीणों और प्रबंधन के बीच भरोसे की कमी का है। यदि स्थानीय लोगों की आशंकाओं का समय रहते समाधान किया जाता, तो शायद टकराव की नौबत नहीं आती। दूसरी ओर, यदि अधिकारी के बयान को लेकर भ्रम पैदा हुआ, तो उसे मौके पर ही स्पष्ट करना भी प्रशासनिक जिम्मेदारी का हिस्सा है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि उत्पादन कंपनी और ग्रामीणों के बीच प्रस्तावित बातचीत किसी सहमति तक पहुंचती है या यह विवाद आगे और गहराता है।

