कांकेर 19 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भानुप्रतापपुर में प्रसूता और नवजात की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने दो स्टाफ नर्सों को निलंबित कर दिया है, जबकि एक अन्य नर्स की वार्षिक वेतन वृद्धि रोक दी गई है। विभागीय जांच में इलाज के दौरान गंभीर लापरवाही की पुष्टि हुई है। हालांकि इस कार्रवाई के बाद सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, जवाबदेही और अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या हर बड़ी घटना के बाद केवल निलंबन ही समाधान है, या फिर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पूरे सिस्टम में सुधार की जरूरत है ?
जानकारी के मुताबिक ये पूरा घटनाक्रम भानुप्रतापपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का है। बताया जा रहा है कि कुछ समय पहले अस्पताल में उपचार के दौरान एक गर्भवती महिला और उसके नवजात शिशु की मौत हो गई थी। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य कर्मियों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए थे। मामला तूल पकड़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने विशेष जांच समिति गठित की थी। जांच समिति की रिपोर्ट में ड्यूटी के दौरान गंभीर कोताही की पुष्टि होने पर स्टाफ नर्स रजनी गजबिये और रोसम्मा को निलंबित कर दिया गया। वहीं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत कार्यरत स्टाफ नर्स रीता बघेल की एक वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने का आदेश जारी किया गया है।
इस पूरे घटनाक्रम पर कार्रवाई के बाद एक बार फिर स्वास्थ विभाग के अधिकारियों ने मरीजों के इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं किये जाने की दलील दी है। इसके साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त निगरानी रखी जाएगी। यह कार्रवाई अपनी जगह महत्वपूर्ण है, लेकिन इससे कई गंभीर सवाल भी सामने आते हैं। यदि जांच में लापरवाही साबित हुई है, तो यह भी तय होना चाहिए कि अस्पताल की निगरानी व्यवस्था, ड्यूटी मॉनिटरिंग और वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही कहां थी। अक्सर सरकारी अस्पतालों में किसी बड़ी घटना के बाद निलंबन की कार्रवाई होती है, लेकिन कुछ समय बाद वही समस्याएं फिर सामने आ जाती हैं।
सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल
राज्य के कई सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की कमी, संसाधनों का अभाव, कार्य के प्रति जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था लंबे समय से चिंता का विषय रही है। ऐसे में मां और नवजात जैसी संवेदनशील मौतें केवल एक अस्पताल की घटना नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी मानी जा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग ने दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई कर स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है, लेकिन आम लोगों की अपेक्षा केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस घटना के बाद अस्पतालों की कार्यप्रणाली में वास्तविक सुधार होगा, ताकि भविष्य में किसी परिवार को इलाज में लापरवाही की कीमत अपनी जान देकर न चुकानी पड़े। सरकारी अस्पतालों में भरोसा तभी मजबूत होगा, जब जवाबदेही के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी स्थायी सुधार दिखाई देगा।

