रायपुर 23 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग की 5,576 करोड़ रुपये से अधिक की तीन महापरियोजनाओं के टेंडर में कथित अनियमितताओं को लेकर पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), मुख्य सचिव और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) से शिकायत की है। उन्होंने 14 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने और विवादित टेंडर निरस्त करने की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि निविदा प्रक्रिया में शासन के नियमों की अनदेखी कर कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया। साथ ही, मंत्रालय से पदमुक्त हो चुके एक अधिकारी द्वारा करीब 49 दिन बाद भी पुराने पद की मुहर लगाकर टेंडर दस्तावेजों को मंजूरी देने का मामला उठाया गया है। विवाद सिकासार-कोडार लिंक कैनाल, मटनार-देवरगांव बैराज और मोहमेला-सिरपुर बैराज परियोजनाओं की निविदाओं से जुड़ा है।
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने शिकायत में समिति की अध्यक्षता बदलने, कंपनियों की पात्रता तय करने में कथित गड़बड़ी और आपत्ति जताने वाले अधिकारियों को हटाए जाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो ने कहा है कि निविदा प्रक्रिया नियमानुसार पूरी की गई है और माननीय उच्च न्यायालय ने भी इसे मान्य किया है। शिकायत के मुताबिक, विवादित तीनों परियोजनाओं की लागत इस प्रकार है…
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सिकासार-कोडार लिंक कैनाल: 2,549.86 करोड़ रुपये
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मटनार-देवरगांव बैराज: 1,636.69 करोड़ रुपये
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मोहमेला-सिरपुर बैराज: 574.73 करोड़ रुपये
इन परियोजनाओं की कुल लागत 5,576 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। पूर्व विधायक की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि निविदा प्रक्रिया के दौरान कुछ कंपनियों को पात्र बनाने के लिए तकनीकी अनुभव, वित्तीय टर्नओवर और वर्क-इन-हैंड से संबंधित शर्तों की कथित तौर पर अनदेखी की गई।
समिति की अध्यक्षता बदलने पर भी विवाद
शिकायत में प्रमुख अभियंता जितेन्द्र नेताम की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि शासन के स्वीकृत आदेश के अनुसार प्री-क्वालिफिकेशन समिति की अध्यक्षता मुख्य अभियंता (प्रबोधन) को करनी थी, लेकिन शासन से अनुमति लिए बिना उन्हें अध्यक्ष पद से हटाकर प्रमुख अभियंता ने स्वयं समिति की अध्यक्षता संभाल ली। शिकायतकर्ता पक्ष ने सवाल उठाया है कि समिति की अध्यक्षता में बदलाव किस आदेश के तहत किया गया और क्या इसके लिए शासन की अनुमति ली गई थी। आरोप है कि इस बदलाव से निविदा प्रक्रिया में पात्रता तय करने और अनुशंसा को मंजूरी देने की व्यवस्था प्रभावित हुई।
मंत्रालय से हटने के 49 दिन बाद पुरानी मुहर से मंजूरी का आरोप
मामले में मुख्य अभियंता मक्सी कुजूर से जुड़े दस्तावेजों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्हें 12 मार्च 2026 को मुख्य अभियंता पद पर पदोन्नति मिली थी। इसके बाद 6 अप्रैल 2026 को उन्हें मंत्रालय में विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (OSD) के पद से मुक्त कर मुख्य अभियंता (महानदी परियोजना, रायपुर) के पद पर पदस्थ किया गया। शिकायत में दावा किया गया है कि 25 मई 2026 को, यानी मंत्रालय से पदमुक्त होने के करीब 49 दिन बाद, तीनों परियोजनाओं के टेंडर और फॉर्म-एफ दस्तावेजों पर ‘Approved’ लिखकर ‘विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी, मंत्रालय’ की मुहर लगाई गई। आरोप है कि इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर कंपनियों के वित्तीय टर्नओवर और तकनीकी अनुभव से जुड़ी पात्रता शर्तें निर्धारित की गईं। शिकायत में इस बात की जांच की मांग की गई है कि मंत्रालय से पदमुक्त होने के बाद पुराने पदनाम और मुहर का इस्तेमाल किस अधिकार के तहत किया गया।
कंपनियों को पात्र बनाने में गड़बड़ी का आरोप
शिकायत में मटनार-देवरगांव बैराज परियोजना में NCC लिमिटेड और ऋत्विक प्रोजेक्ट्स तथा मोहमेला-सिरपुर बैराज परियोजना में ओम मेटल्स समेत कुछ कंपनियों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कुछ कंपनियों के वर्क-इन-हैंड और तकनीकी अनुभव से जुड़ी शर्तें पूरी नहीं होने के बावजूद उन्हें निविदा प्रक्रिया में पात्र घोषित किया गया। शिकायत में यह भी सवाल उठाया गया है कि टेंडर दस्तावेजों को मंजूरी देने के बाद मक्सी कुजूर की फील्ड स्तर पर निविदा प्रक्रिया में क्या भूमिका रही।इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित निविदा दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
आपत्ति जताने वाले अधिकारियों को हटाने का दावा
पूर्व विधायक की शिकायत में निविदा प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाले तीन अधिकारियों के संबंध में भी आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के मुताबिक, संविदा अधिकारी गुरुवर ने कथित तौर पर अपात्र कंपनियों को पात्र घोषित करने का विरोध किया था। इसके बाद उन पर दबाव बनाए जाने और एक महीने का वेतन अपनी जेब से भरकर इस्तीफा देने का आरोप है। दूसरे संविदा अधिकारी भागवत को कथित तौर पर टेंडर से ठीक पहले हटाया गया और एक सप्ताह के भीतर बिना नोटिस उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। वहीं, कार्यपालन अभियंता शिवराम सिधारे ने स्वीकृत निविदा दस्तावेजों में कथित नियमविरुद्ध बदलाव का विरोध किया था। शिकायत में दावा किया गया है कि इसके बाद उन्हें हटाकर प्रमुख अभियंता कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया।
जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो के मुताबिक, निविदा प्रक्रिया नियमानुसार पूरी की गई है और माननीय उच्च न्यायालय ने भी इसे मान्य किया है। ऐसे में एक ओर पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने PMO, मुख्य सचिव और EOW से शिकायत कर 14 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और टेंडर निरस्त करने की मांग की है, वहीं दूसरी ओर विभाग ने निविदा प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप बताया है। अब शिकायत में उठाए गए सवालों, संबंधित दस्तावेजों और विभाग के पक्ष की जांच के आधार पर ही कथित अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


